जापान में मानसिक तनाव से राहत पाने के लिए एक बेहद अनोखा और चर्चा में आया ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे “कॉफिन लाइंग” या “कॉफिन मेडिटेशन” कहा जा रहा है, जिसमें लोग कुछ समय के लिए ताबूत के अंदर लेटकर ध्यान लगाते हैं और जीवन-मृत्यु पर चिंतन करते हैं। आधुनिक भागदौड़ और मानसिक दबाव से जूझ रहे लोग इसे आत्ममंथन और शांति पाने का नया तरीका मान रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, लोग 30 मिनट के इस अनुभव के लिए करीब 1100 रुपये तक खर्च कर रहे हैं, ताकि वे खुद को कुछ देर के लिए बाहरी दुनिया से अलग कर सकें।
इस ट्रेंड की शुरुआत सबसे पहले चीबा प्रीफेक्चर के एक फ्यूनरल होम से हुई बताई जाती है, जहां लोगों को जीवन की नश्वरता का एहसास कराने और मानसिक संतुलन बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रयोग शुरू किया गया था। धीरे-धीरे यह प्रयोग एक व्यावसायिक सेवा में बदल गया और अब कई स्पा व वेलनेस सेंटर इसे एक अनूठे मेडिटेशन सेशन के रूप में पेश कर रहे हैं। तनाव, अकेलापन और आत्मचिंतन की चाह रखने वाले लोग इसे अपनाने लगे हैं, जिससे यह ट्रेंड सोशल मीडिया और वेलनेस इंडस्ट्री में तेजी से वायरल हो गया है।
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर New York Post में प्रकाशित खबरों के बाद यह ट्रेंड वैश्विक चर्चा का विषय बन गया। रिपोर्ट में बताया गया कि ताबूत के अंदर लेटकर लोग अपनी जिंदगी, असफलताओं, उपलब्धियों और मृत्यु की अनिवार्यता पर विचार करते हैं। इससे उन्हें जीवन की वास्तविकता को स्वीकार करने और तनाव को कम करने में मदद मिलती है। कई विशेषज्ञ इसे “मोर्टेलिटी मेडिटेशन” यानी मृत्यु-चिंतन ध्यान की आधुनिक शैली बता रहे हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
जापानी संस्कृति में मृत्यु को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा माना जाता है। यहां “कूयो” जैसी परंपराएं पहले से मौजूद हैं, जिनमें दिवंगत आत्माओं को स्मरण कर उनका सम्मान किया जाता है। इसी सांस्कृतिक सोच के कारण ताबूत में ध्यान लगाने का यह प्रयोग समाज में बहुत ज्यादा अस्वाभाविक नहीं माना जा रहा। लोग इसे भय से जुड़ी चीज की बजाय जीवन के अर्थ को समझने का माध्यम मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मृत्यु के विचार से भागने के बजाय उसे स्वीकार करना व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बना सकता है।
इस सेवा को उपलब्ध कराने वाले स्पा और वेलनेस सेंटर में ताबूत भी पारंपरिक नहीं, बल्कि आधुनिक और आकर्षक डिजाइन वाले बनाए गए हैं। टोक्यो के कुछ स्पा में रंग-बिरंगे और स्टाइलिश कॉफिन तैयार किए गए हैं, ताकि लोगों को डर नहीं बल्कि सुकून का अनुभव हो। उपयोगकर्ता अपनी पसंद के अनुसार खुला या बंद ताबूत चुन सकते हैं। सेशन के दौरान वे सुकून भरा संगीत सुन सकते हैं, छत पर चलने वाला शांत वीडियो देख सकते हैं या पूरी तरह मौन रहकर ध्यान कर सकते हैं। कई लोग इसे डिजिटल डिटॉक्स और गहरी आत्मचिंतन की प्रक्रिया के रूप में भी अपना रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड ऐसे समय में उभरा है जब जापान में तनाव, अकेलापन और आत्महत्या की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। कई वेलनेस कंपनियां मानसिक शांति के लिए अलग-अलग रचनात्मक प्रयोग कर रही हैं, जिनमें कॉफिन मेडिटेशन सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह लोगों को यह एहसास दिलाने की कोशिश करता है कि जीवन सीमित है, इसलिए वर्तमान क्षण को समझना और स्वीकार करना जरूरी है। इससे व्यक्ति अपने डर, चिंता और असुरक्षा पर गहराई से विचार कर पाता है।
हालांकि, इस ट्रेंड को लेकर बहस भी छिड़ी हुई है। कुछ लोग इसे मानसिक शांति का नया तरीका मानते हैं, तो कुछ इसे असामान्य और डरावना प्रयोग बताते हैं। आलोचकों का कहना है कि ताबूत जैसे प्रतीकात्मक माहौल में ध्यान करना हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता, खासकर उन लोगों के लिए जो अवसाद या भय से जूझ रहे हों। वहीं समर्थकों का तर्क है कि यह अनुभव व्यक्ति को जीवन के प्रति ज्यादा संवेदनशील और आभारी बनाता है।
कॉफिन मेडिटेशन सेशन संचालित करने वाले आयोजकों का दावा है कि इस अनुभव के बाद कई प्रतिभागियों ने खुद को पहले से अधिक शांत, केंद्रित और भावनात्मक रूप से संतुलित महसूस किया। कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि ताबूत में लेटकर उन्हें जीवन की अनिश्चितता का एहसास हुआ, जिससे उन्होंने अपने रिश्तों और लक्ष्यों को नए नजरिए से देखना शुरू किया। इस अनोखे प्रयोग ने वेलनेस इंडस्ट्री में एक नया आयाम जोड़ दिया है, जहां पारंपरिक योग और ध्यान के साथ अब ‘मृत्यु-चिंतन’ आधारित मेडिटेशन भी चर्चा में आ गया है।
तेजी से वायरल हो रहे इस ट्रेंड ने दुनिया भर में लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं, जहां लोग शांत वातावरण में रंगीन ताबूत के भीतर लेटे नजर आते हैं। मानसिक शांति की तलाश में लोग अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ ऐसे अनोखे प्रयोगों की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं, जो उन्हें खुद से जुड़ने और जीवन के गहरे अर्थ को समझने का मौका देते हैं।













