वाराणसी। डोमरी (सुजाबाद) में नगर निगम का बहुप्रतीक्षित ‘ग्रीन काशी’ प्रोजेक्ट अब जमीन पर तेजी से नजर आने लगा है। करीब 350 बीघा में विकसित हो रहे इस विशाल मियावाकी शहरी वन का निरीक्षण करने बुधवार को महापौर Ashok Kumar Tiwari और नगर आयुक्त Himanshu Nagpal मौके पर पहुंचे।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी सराहना मिल चुकी है। अब तक यहां 2.51 लाख से अधिक पौधे रोपे जा चुके हैं, जिनकी अच्छी वृद्धि और जीवित रहने की दर को देखकर महापौर ने संतोष जताया। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि देखरेख में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गर्मी से बचाव के लिए विशेष प्लान
बढ़ते तापमान को ध्यान में रखते हुए महापौर ने तुरंत प्रभाव से विशेष कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए। इसके तहत पूरे वन क्षेत्र में ग्रीन नेट लगाने, रेनगन सिस्टम के जरिए सिंचाई को और बेहतर बनाने, समय-समय पर खाद देने और नियमित निराई-गुड़ाई सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि पौधों की वृद्धि प्रभावित न हो।
60 घाटों की थीम पर विकसित हो रहा वन
इस परियोजना की खासियत इसका काशी के पौराणिक घाटों से जुड़ाव है। पूरे क्षेत्र को अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है, जिनका नाम Dashashwamedh Ghat, Manikarnika Ghat, Assi Ghat जैसे प्रमुख घाटों पर रखा गया है।
हर सेक्टर में शीशम, सागौन, अर्जुन सहित 27 देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं, वहीं अश्वगंधा और गिलोय जैसे औषधीय पौधों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह वन जैव विविधता का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
रिकॉर्ड रोपण और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
नगर निगम ने 1 मार्च को एक घंटे में 2,51,446 पौधे लगाकर एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। इस उपलब्धि को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पूरे क्षेत्र में 25 सीसीटीवी कैमरे, 20 हाईमास्ट लाइटें और 24 घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।
पर्यावरण के साथ आय का भी स्रोत
आने वाले समय में ‘ग्रीन काशी’ न केवल वाराणसी के लिए एक बड़े ऑक्सीजन बैंक के रूप में काम करेगा, बल्कि गंगा किनारे हरित विरासत को मजबूत करते हुए पर्यटन और आय सृजन का भी अहम माध्यम बनेगा।













