सोनभद्र। जिले में धान खरीद को लेकर किसानों के साथ हो रहे कथित भेदभाव और अनियमितताओं का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को पत्र भेजते हुए धान खरीद व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और तत्काल सुधार की मांग की है।
डॉ. धर्मवीर तिवारी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि सोनभद्र जिले के अन्नदाता किसानों से प्रति बीघा मात्र 10 कुंतल धान की खरीद की जा रही है, जबकि पड़ोसी जनपद चंदौली में किसानों से 15 कुंतल प्रति बीघा धान खरीदा जा रहा है। उन्होंने इसे किसानों के साथ सीधा भेदभाव बताया और कहा कि एक ही प्रदेश में दो अलग-अलग मानक अपनाना अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एआर कोऑपरेटिव और डिप्टी आरएमओ द्वारा शासन को गलत और भ्रामक रिपोर्ट भेजी जा रही है, जिससे वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पा रही है। डॉ. तिवारी का कहना है कि मिलरों और कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते किसान मजबूरी में कम दामों पर अपना धान बेचने को विवश हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पत्र में यह भी मांग की गई है कि धान खरीद शुरू होने से पहले और खरीद प्रक्रिया के दौरान मिलरों के स्टॉक की गहन जांच कराई जाए। उनका कहना है कि इससे बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। साथ ही उन्होंने सर्वे एजेंसियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना स्थलीय निरीक्षण के ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई, जिससे किसानों के अंश निर्धारण में गंभीर गड़बड़ी हो रही है।
डॉ. तिवारी ने बताया कि कई किसान तहसीलों और संबंधित कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया में भी लगातार तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे किसान समय पर धान बेचने में असमर्थ हो रहे हैं।
उन्होंने हाईब्रिड और मोटे धान की खरीद सुनिश्चित करने, दोषी अधिकारियों और मिलरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। इस अवसर पर अरविंद पांडे, जयशंकर देव, राम नारायण, सुरेश कुमार सहित कई अन्य किसान और पदाधिकारी मौजूद रहे।













