वाराणसी। कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए वाराणसी पुलिस ने अहम सफलता हासिल की है। पुलिस ने रोहनिया और सारनाथ थाना क्षेत्र से मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जो शेल कंपनियों के माध्यम से हवाला के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को सफेद करने में शामिल थे। प्रारंभिक जांच में करीब 40 करोड़ रुपये के लेन-देन की बात सामने आ रही है।
गिरफ्तार आरोपियों में रोहनिया थाना क्षेत्र के स्वप्निल केशरी, दिनेश यादव और आशीष यादव तथा सारनाथ थाना क्षेत्र के विष्णु पांडे और लोकेश अग्रवाल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी से अर्जित धन को हवाला के जरिए वाराणसी लाते थे और फर्जी दस्तावेजों व शेल कंपनियों के सहारे उसे वैध कारोबारी लेन-देन के रूप में दर्शाते थे। हवाला लेन-देन के दौरान कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
एडीसीपी नीतू कात्यायन ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल की फर्म ‘न्यू वृद्धि फार्मा’ के इर्द-गिर्द किया जा रहा था। जांच के दौरान सामने आया कि कई शेल कंपनियां केवल कागजों पर संचालित हो रही थीं, जिनके पते छोटे कमरों या दुकानों के थे। इन्हीं कंपनियों के माध्यम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और कारोबारी लेन-देन दिखाकर अवैध धन को सफेद किया जाता था। एक मामले में पीडी फार्मा को न्यू वृद्धि फार्मा की ओर से अनुभव प्रमाण पत्र जारी किए जाने का भी खुलासा हुआ है।
पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने तकनीकी सर्विलांस और कोड वर्ड की जानकारी के आधार पर आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। फिलहाल मुख्य सरगना शुभम जायसवाल की तलाश तेज कर दी गई है और मामले की गहन जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की जांच में तस्करी और हवाला से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।









