वाराणसी। नववर्ष की पूर्व संध्या और नए साल के मौके पर गंगा घाटों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल पुलिस ने गंगा में सुरक्षित नौकायन सुनिश्चित करने के लिए नाविकों और नाव संचालकों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
रविवार को दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी पर सहायक पुलिस आयुक्त (जल पुलिस) विजय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में नाव संचालकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नववर्ष के साथ-साथ प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के कारण वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
एसीपी विजय प्रताप सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी नाव पर उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां नहीं बैठाई जाएंगी। प्रत्येक नाव में लाइफ जैकेट, लाइफ ट्यूब, रस्सा सहित अन्य आवश्यक जीवन रक्षक उपकरण अनिवार्य रूप से मौजूद होने चाहिए। बिना लाइफ जैकेट के किसी भी यात्री को नाव पर बैठाने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों को नाव पर बैठाने से पहले किराया तय कर लिया जाए, जिससे किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
सुरक्षा के मद्देनजर नाव में आग, जलती माचिस, बीड़ी या सिगरेट के टुकड़े फेंकने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। यात्रियों को भी इसके लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। नशे की हालत में नाव चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साथ ही नाबालिग बच्चों से किसी भी स्थिति में नाव संचालन नहीं कराया जाएगा। छोटी और चप्पू से चलने वाली नावों का संचालन सायंकाल चार बजे के बाद बंद रहेगा।
गंगा आरती के दौरान दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और नमो घाट पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। नावों को एक स्थान पर भीड़ के रूप में खड़ा नहीं किया जाएगा और श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित तरीके से आरती दर्शन कराने पर जोर दिया गया है।
बैठक में प्रभारी निरीक्षक जल पुलिस राज किशोर पांडेय, उपनिरीक्षक शशि प्रताप सिंह, रामप्रवेश सिंह और एनडीआरएफ के उपनिरीक्षक अंकुर गंगवार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
जल पुलिस ने साफ कहा है कि जारी किए गए सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन करने वाले नाविकों और संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नववर्ष के अवसर पर गंगा में नौकायन पूरी तरह सुरक्षित रहे और किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो।













