वाराणसी। केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ से एक नई संगठनात्मक पहल की घोषणा की गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी’ नामक संरचना के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है, जिसे धार्मिक-सामाजिक उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
घोषणा में कहा गया कि यह संगठन चार प्रमुख आधार—मनबल, तनबल, जनबल और धनबल—पर कार्य करेगा। मनबल के अंतर्गत विद्वान, संत, अधिवक्ता और मीडिया से जुड़े लोग वैचारिक पक्ष संभालेंगे, जबकि तनबल के अंतर्गत प्रशिक्षित कार्यकर्ता सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां निभाएंगे।
संगठन में प्राचीन भारतीय व्यवस्था की तर्ज पर नौ स्तर का पदानुक्रम प्रस्तावित किया गया है, जिसमें विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां निर्धारित की जाएंगी। शीर्ष नेतृत्व में महिला और तृतीय लिंग के प्रतिनिधित्व की भी बात कही गई है, जिससे संगठन में व्यापक सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
इस पहल का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों में जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाना बताया गया है। साथ ही, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एक संगठित ढांचा विकसित करने की बात कही गई है।
घोषणा के साथ ही संगठन में शामिल होने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पहल को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, और इसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।









