चंदौली। लोकनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामगढ़ में हिंदी पखवाड़ा का समापन समारोह रविवार को धूमधाम से सम्पन्न हुआ। 1 सितंबर से आरंभ हुई भाषा कार्यशाला में स्नातक, स्नातकोत्तर, शिक्षा संकाय, डीएलएड और बीटीसी के प्रशिक्षुओं तथा छात्र-छात्राओं ने निबंध लेखन, कविता पाठ, प्रश्नोत्तरी और नाटक जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी की।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि संस्थापक प्रबंधक धनंजय सिंह ने माँ सरस्वती, बाबा कीनाराम और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिक्षाविद् स्व. लोकनाथ सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
हिंदी विभागाध्यक्ष ने छात्रों को हिंदी भाषा को बोलचाल, लेखन और साहित्यिक गतिविधियों में अधिक अपनाने के लिए प्रेरित किया। वहीं सांस्कृतिक प्राध्यापक संजय सिंह ने हास्य कवि सम्मेलन, नृत्य और लोकगीत प्रस्तुत कर वातावरण को जीवंत बनाया।
मुख्य वक्ता डॉ. विनय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी पखवाड़ा हिंदी भाषा के संवर्धन और सम्मान के लिए मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को केंद्र सरकार की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रेमचंद पांडेय ने अनुच्छेद 343 का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
मुख्य अतिथि धनंजय सिंह ने अपने उद्बोधन की शुरुआत भारतेंदु हरिश्चंद्र की पंक्ति “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल” से की और कहा कि मातृभाषा का विकास ही समस्त उन्नतियों का आधार है।













