चंदौली। मुगलसराय कस्बे में प्रतिष्ठित दवा कारोबारी रोहितास पाल उर्फ रोमी की हत्या को करीब दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन वारदात को अंजाम देने वाले असली शूटर अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस ने 25 नवंबर को तीन साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी दिखाकर भले ही अपनी कार्रवाई को सफल बताने की कोशिश की हो, लेकिन बिना शूटरों के पकड़े यह दावा कितना ठोस है—यह सवाल अब जनता और व्यापारियों के बीच गूंज रहा है।
हत्या के पीछे की कड़ी अब भी धुंध में
18 नवंबर की शाम पॉपुलर मेडिकल स्टोर के संचालक रोमी पाल को दुकान पर ही ताबड़तोड़ गोलियां मार दी गई थीं। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा था कि आरोपी फायरिंग के बाद आराम से पैदल ही निकल गया। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि पुलिस जल्द आरोपी शूटरों तक पहुंचेगी, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आ सका है।
केवल ‘साजिशकर्ता’ पकड़े गए—पर साजिश रची कहाँ और कैसे?
पुलिस ने 25 नवंबर को वाराणसी के नदेसर निवासी भानु जायसवाल, मुगलसराय के मनोज कुमार जायसवाल और ओमप्रकाश जायसवाल को हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन असली सवाल यही है कि—
- जब शूटर पकड़े ही नहीं गए
- फायरिंग करने वाले की पहचान तय नहीं
- वारदात में शामिल कुल आरोपियों की संख्या स्पष्ट नहीं
तो फिर साजिश का खुलासा किस आधार पर किया गया?
इसी बात पर पुलिस की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मामले के अहम पहलू अब भी अनसुलझे
- हत्या की सुपारी किसने और कितने में दी?
- हत्या की योजना कब और कहाँ बनी?
- शूटर कहाँ से लाए गए और वारदात के बाद किधर भागे?
- क्या मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी या अन्य तकनीकी साक्ष्य मिले भी हैं या नहीं?
इन सभी बिंदुओं पर पुलिस अभी तक कुछ भी आधिकारिक रूप से साफ नहीं कर पाई है।
पुलिस की 9 टीमें—पर कामयाबी शून्य
एसपी आदित्य लांग्हे का दावा है कि शूटरों की गिरफ्तारी के लिए 9 टीमें तैनात हैं और जल्द बड़ी सफलता की उम्मीद है। लेकिन वारदात की गंभीरता को देखते हुए अब लोगों का धैर्य टूटता नजर आ रहा है।
दवा कारोबारियों और स्थानीय व्यापार मंडल की ओर से भी मांग उठी है कि पुलिस शूटरों को शीघ्र गिरफ्तार करे और हत्या की पूरी साजिश का पर्दाफाश करे, ताकि व्यापारी वर्ग में फैली दहशत कम हो सके।













