वाराणसी। मकर संक्रांति का पर्व नजदीक आते ही पतंगबाजी की तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर और जानलेवा खतरा भी तेजी से उभरकर सामने आ रहा है। प्रतिबंधित चाइना मांझा एक बार फिर शहर के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। यह धारदार और मजबूत डोर न केवल पतंग उड़ाने वालों के बीच प्रतिस्पर्धा का साधन बन रही है, बल्कि आम लोगों, राहगीरों और पक्षियों के लिए मौत की वजह भी बन रही है।
चाइना मांझा सामान्य सूती धागे की तुलना में बेहद पतला और तेज धार वाला होता है। हवा में लगभग अदृश्य रहने वाली यह डोर दोपहिया वाहन चालकों के लिए खास तौर पर खतरनाक साबित हो रही है। अचानक गर्दन, चेहरे या आंखों पर फंसने से गंभीर चोटें लग रही हैं। शहर में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें लोग गंभीर रूप से घायल हुए या अपनी जान तक गंवा बैठे। इसके अलावा, उड़ते पक्षी भी इस मांझे में उलझकर घायल हो रहे हैं या तड़प-तड़पकर दम तोड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वाराणसी में चाइना मांझा का अवैध कारोबार अब भी पूरी तरह बंद नहीं हो पाया है। दालमंडी, औरंगाबाद और जमुना टॉकीज जैसे इलाकों में पतंग और डोर की आड़ में चोरी-छिपे इसकी बिक्री किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद कुछ दुकानदार मुनाफे के लालच में इस खतरनाक मांझे को बाजार तक पहुंचा रहे हैं।
प्रशासन और पुलिस की ओर से समय-समय पर छापेमारी और जब्ती की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। आम लोगों का आरोप है कि कार्रवाई सीमित दायरे तक ही रह जाती है, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले कम नहीं हो रहे। उनका कहना है कि यदि सख्ती लगातार और व्यापक स्तर पर की जाए, तो इस खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।
समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि मकर संक्रांति से पहले विशेष अभियान चलाकर संवेदनशील इलाकों में सघन जांच की जाए। चाइना मांझा बेचने और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो, साथ ही आम जनता को इसके जानलेवा दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाए। लोगों का मानना है कि पतंगबाजी खुशी और परंपरा का पर्व है, लेकिन लापरवाही और लालच इसे मातम में बदल सकता है। समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो कई परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता है।









