चंदौली। दीपावली के दूसरे दिन भैया दूज के पावन अवसर पर चंदौली जनपद के जामडीह गांव स्थित प्रसिद्ध जामेश्वर महादेव मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पुत्र प्राप्ति की कामना को लेकर श्रद्धालु देशभर से यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां भगवान शिव की आराधना करता है, उसकी संतान प्राप्ति की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
सदर ब्लॉक के जामडीह गांव में स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां एक ही चबूतरे पर दो शिवलिंग विराजमान हैं, जिन्हें “जोड़ेश्वर महादेव” या “जामेश्वर महादेव” कहा जाता है। दिवाली के दूसरे दिन भैया दूज पर भक्तजन स्नान करके मंदिर पहुंचते हैं, जलाभिषेक करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर घंटियां चढ़ाते हैं। यह धार्मिक स्थल करीब दो सौ वर्ष पुराना बताया जाता है।
बुधवार को सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महिलाओं ने पोखरे में स्नान कर भीगे कपड़े वहीं त्याग दिए और नए वस्त्र धारण कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। पूरे वातावरण में “हर हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए।
स्थानीय मान्यता है कि इस पवित्र कुंड में स्नान करने से महिलाओं के बंध्यत्व का दोष दूर हो जाता है और उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। भक्त बताते हैं कि यहां की मिट्टी और जल दोनों ही दिव्य शक्ति से परिपूर्ण हैं, जो आस्था को विश्वास में बदल देते हैं।
मंदिर की स्थापना से जुड़ी कथा भी अत्यंत रोचक है। बताया जाता है कि करीब दो सौ वर्ष पूर्व गाजीपुर निवासी सुखलाल अग्रहरि घोड़े से वाराणसी जा रहे थे। थकान के कारण वे जामडीह में एक पेड़ के नीचे विश्राम करने लगे। उसी रात उन्हें स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए और उस स्थान पर मंदिर निर्माण का आदेश मिला। अगले दिन उन्होंने खुदाई कराई, जिसमें दो शिवलिंग प्राप्त हुए। इसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ और सुखलाल अग्रहरि को तीन पुत्रों की प्राप्ति हुई। तभी से यह मान्यता चल पड़ी कि यहां पुत्र प्राप्ति के लिए पूजा-अर्चना करने वालों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
भैया दूज के अवसर पर यहां हर वर्ष विशाल मेले का आयोजन होता है। सैकड़ों दुकानों के साथ झूले, मिठाइयां और पूजा सामग्री की दुकानों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में तब्दील हो जाता है। दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु रात्रि तक जलाभिषेक और पूजन में लीन रहते हैं।
जामेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का भी प्रतीक बन चुका है। हर वर्ष यहां उमड़ने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आस्था और विश्वास आज भी जनमानस में गहराई से रचा-बसा है।













