चंदौली। बलुआ थाना अंतर्गत महमदपुर और तिरगावा गांव के बीच बनी पुलिया पर गंगा का पानी भरने लगा है। लगातार तीसरी बार गंगा का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों और किसानों में दहशत का माहौल है। खेतों, घरों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर लोग बेहद चिंतित हैं।
तटवर्ती गांवों में संकट गहराया
गंगा का पानी बढ़ने से भूपौली, डेरवा, महडौरा, कांवर, विसुपुर, महुअरिया खास, बलुआ, सराय, डेरवाकलां, महुअरकलां, विजयी का पूरा, गनेश का पूरा, चकरा, हरधन जुड़ा, सोनबरसा, टांडा कलां, सरौली, महमदपुर, जमालपुर, हसनपुर, भूसौला, सरैया, बड़गावा, कुरा और मुकुंदपुर सहित दर्जनों गांवों पर संकट मंडराने लगा है। ग्रामीणों को डर है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो जाएंगी और दैनिक जीवन यापन प्रभावित होगा।
पलायन और जीव-जंतुओं से खतरा
गांवों में पानी घुसने से ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करना पड़ सकता है। पहले भी कई बार लोग ऐसे हालात में ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हुए हैं। समस्या यह भी है कि इन्हीं जगहों पर पानी से बिलबिलाए जहरीले जीव-जंतु भी पहुंच जाते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
नाले का फाटक साबित हो रहा नाकाफी
महमदपुर नाले पर लगा जलरोधी फाटक पानी रोकने में पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो रहा है। स्थानीय किसान शिवपूजन यादव ने बताया कि जेई मौके पर पहुंचे थे और उन्होंने कहा कि गंगा का जलस्तर घटने के बाद फाटक की मरम्मत कराई जाएगी। फिलहाल इस फाटक से पानी रिसकर खेतों में भर रहा है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने मांगी ठोस कार्यवाही
गांव के श्यामजीत यादव, रामअशीष, चंद्रहास उर्फ़ रोरी, अभिषेक उर्फ बिट्टू और राजू करन ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि गंगा के जलस्तर को नियंत्रित करने और तटवर्ती गांवों को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। ग्रामीणों का कहना है किहर साल बाढ़ की समस्या विकराल रूप लेती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होती।









