प्रयागराज। जिले के पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र अंतर्गत सल्लाहपुर चौकी के केशवपुर कुसुआ गांव में बुधवार दोपहर एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। गांव के बाहर स्थित एक खुले तालाब में डूबने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में तीन मासूम बच्चे और एक 19 वर्षीय युवक शामिल है। एक ही परिवार और गांव से जुड़े इस हादसे के बाद गांव में कोहराम मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोपहर के समय बच्चे तालाब के किनारे खेल रहे थे। खेल-खेल में वे गहरे पानी की ओर चले गए और देखते ही देखते डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख 19 वर्षीय युवक करण सोनकर उन्हें बचाने के लिए तालाब में कूदा, लेकिन वह भी गहराई और कीचड़ की वजह से बाहर नहीं निकल सका। कुछ ही देर में चारों तालाब में डूब गए। काफी देर तक जब बच्चे घर नहीं लौटे तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की, जिसके बाद तालाब के किनारे बच्चों के कपड़े और चप्पल बिखरी हुई मिलीं।
हादसे में प्रतीक सोनकर (12 वर्ष) पुत्र प्रदीप सोनकर, प्रिंस सोनकर (10 वर्ष) पुत्र प्रदीप सोनकर, प्रियांशु सोनकर (11 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय संदीप सोनकर और करण सोनकर (19 वर्ष) पुत्र राजेश सोनकर की मौत हो गई। सभी मृतक एक ही गांव के निवासी और सोनकर परिवार से संबंधित बताए जा रहे हैं।
सूचना मिलते ही पुरामुफ्ती थाना पुलिस मौके पर पहुंची। ग्रामीणों और राहत कार्यकर्ताओं की मदद से तालाब से चारों शव बाहर निकाले गए और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया यह मामला दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, हालांकि परिजनों की ओर से आशंका जताई जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। मृतकों के घरों में चीख-पुकार मची है और परिजन बदहवासी की हालत में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के आसपास स्थित खुले तालाब और जलाशय लगातार हादसों का कारण बन रहे हैं, लेकिन इनके चारों ओर न तो कोई सुरक्षा घेरा है और न ही चेतावनी संकेत लगे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने जिला प्रशासन को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यह हादसा ग्रामीण इलाकों में बच्चों की सुरक्षा और खुले जलस्रोतों को सुरक्षित करने की जरूरत पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।













