वाराणसी। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से एक विशेष ज्योतिषीय संयोग के साथ शुरू हो रही है। लगभग नौ दशक बाद ऐसा अवसर बन रहा है जब प्रतिपदा तिथि के क्षय के कारण अमावस्या तिथि में ही कलश स्थापना की जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जा रहा है।
पंचांग के मुताबिक इस बार हिंदू नववर्ष के पहले दिन प्रतिपदा तिथि का अभाव रहेगा, जिसके कारण नवरात्रि का आरंभ पुराने वर्ष में ही हो जाएगा। इसी वजह से श्रद्धालुओं के लिए कलश स्थापना के तीन अलग-अलग शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इससे लोग अपनी सुविधा के अनुसार मां दुर्गा की पूजा और घट स्थापना कर सकेंगे।
धार्मिक नगरी वाराणसी में नवरात्रि के दौरान पारंपरिक नौ गौरी पूजन की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी होगा।
पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्रि में अष्टमी तिथि 26 मार्च को और नवमी तिथि 27 मार्च को पड़ेगी। इसी दिन भगवान राम के जन्मोत्सव रामनवमी का पर्व भी मनाया जाएगा, जिससे इस बार का नवरात्रि उत्सव और अधिक विशेष माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यता है कि इस तरह के दुर्लभ योग में की गई मां दुर्गा की आराधना साधना, सिद्धि और शक्ति प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा भक्तों को विशेष पुण्य फल प्रदान कर सकती है।









