वाराणसी। चौबेपुर थाना क्षेत्र स्थित प्राचीन मारकंडे महादेव कैथी धाम में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। आधी रात से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर के बाहर लगनी शुरू हो गईं और ‘कतारे बाबा’ के दर्शन व जलाभिषेक का सिलसिला देर रात तक लगातार चलता रहा। भोलेनाथ के जयघोष और घंटों-घड़ियाल की ध्वनि से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।
मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन के अनुसार रविवार दोपहर तक करीब दो लाख श्रद्धालु धाम में पहुंच चुके थे। दूर-दराज जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त जल, बेलपत्र और दूध लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। मंदिर परिसर, मुख्य मार्गों और घाटों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और अलग-अलग प्रवेश व निकास मार्ग बनाए गए थे, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।
यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया। वाहनों की पार्किंग के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए गए, ताकि मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति न बने। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्थायी चिकित्सा शिविर लगाए गए, जहां जरूरतमंद श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। पेयजल, प्रसाद वितरण और विश्राम के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए थे।
दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ती गई। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग श्रद्धालु भक्ति भाव से कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कई श्रद्धालु कांवड़ लेकर पहुंचे और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से पूरा धाम गूंजता रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह शिवमय हो उठा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रही। व्यापारियों और दुकानदारों में भी उत्साह देखा गया, क्योंकि बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ गई।
शाम होते-होते भी श्रद्धालुओं का आना-जाना लगातार जारी रहा। प्रशासन और मंदिर समिति के समन्वय से पूरी व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही। पूरे दिन चले इस भव्य धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि काशी की आस्था और परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी सदियों पहले थी।













