चंदौली। जिला अस्पताल में मंगलवार को उपचार के दौरान एक 30 वर्षीय महिला की मौत हो जाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। मृतका के परिजनों ने चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को मौके पर बुलाया गया, जिसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
सदर कोतवाली क्षेत्र के डेविल गांव निवासी शिवानंद तिवारी की पत्नी रागिनी तिवारी (30) गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में 19 जनवरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराई गई थीं। परिजनों का आरोप है कि भर्ती के बाद महिला को समुचित इलाज नहीं मिला और डॉक्टरों ने समय पर मरीज को नहीं देखा।
परिजनों ने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी और उन्होंने बार-बार ब्लड चढ़ाने की मांग की, लेकिन एक यूनिट ब्लड आधा चढ़ने के बाद ही चिकित्सक मौके से चले गए। आरोप है कि इसके बाद लगातार चार दिनों तक कोई भी डॉक्टर महिला को देखने नहीं आया, जिससे उसकी हालत और बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
वहीं, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एस.पी. सिंह ने आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि परिजनों ने पहले महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां से गंभीर हालत में 19 जनवरी को जिला अस्पताल लाया गया था, जहां जांच में महिला के 75 प्रतिशत से अधिक झुलसने की पुष्टि हुई थी। परिजनों की सहमति के बाद ही उपचार शुरू किया गया था।
मृतका रागिनी तिवारी के पति शिवानंद तिवारी गुजरात के सूरत शहर में निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं। रागिनी अपने पीछे दो मासूम बच्चियों को छोड़ गई हैं, जिनमें छह वर्षीय अंजलि और छह माह की वैष्णवी शामिल हैं। मां की मौत के बाद बच्चों और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में इलाज व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रही है।













