चंदौली। जनपद के मुगलसराय कस्बे में बन रही सिक्स लेन सड़क परियोजना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी और सैकड़ों टन सरिया गायब होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD), कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का खेल किया गया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक ने कहा कि सिक्स लेन सड़क जैसे भारी यातायात वाले प्रोजेक्ट में तकनीकी मानकों के अनुसार 16 एमएम सरिया का प्रयोग अनिवार्य होता है, ताकि सड़क की मजबूती बनी रहे और भविष्य में धंसाव या टूट-फूट न हो। लेकिन मुगलसराय में हो रहे निर्माण में न तो मानक स्तर की सरिया दिखाई दे रही है और न ही निर्माण की गुणवत्ता संतोषजनक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यस्थल से बड़ी मात्रा में सरिया गायब है और बिना पर्याप्त सुदृढ़ीकरण के सड़क निर्माण तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे आने वाले समय में सड़क के जल्दी खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
मामला तब और संदिग्ध हो गया जब पीडब्ल्यूडी विभाग ने सड़क निर्माण से जुड़ी मेजरमेंट बुक (MB Book) दिखाने से इनकार कर दिया। संतोष कुमार पाठक का कहना है कि उन्होंने कई बार लिखित और मौखिक रूप से एमबी बुक उपलब्ध कराने की मांग की, यहां तक कि अनशन भी किया, लेकिन विभाग ने अब तक कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया। उनका आरोप है कि एमबी बुक छिपाना इस बात का संकेत है कि कागजों में कुछ और और जमीन पर कुछ और दिखाया जा रहा है।
आंदोलन में शामिल पीडब्ल्यूडी और विकास प्राधिकरण के सेवानिवृत्त अधिकारी संतोष ओझा ने भी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तकनीकी दृष्टि से सिक्स लेन सड़क में 16 एमएम सरिया का उपयोग बेहद जरूरी है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वाराणसी क्षेत्र में हुए अन्य बड़े सड़क निर्माण कार्यों में इन मानकों का पालन किया गया था, जबकि मुगलसराय में स्थिति बिल्कुल अलग नजर आ रही है।
इस मुद्दे को लेकर स्थानीय युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी है। अजय यादव गोलू और पिंटू सिंह राजपूत ने इसे जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में सड़क की हालत और सरकारी धन दोनों का भारी नुकसान होगा।
संतोष कुमार पाठक ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे सार्वजनिक निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में मामले की जांच की मांग उठाई।













