चंदौली। गरीबों को मुफ्त इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के दावों के साथ शुरू हुई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना अब गंभीर सवालों के घेरे में है। चकिया नगर निवासी एक भुक्तभोगी ने जिला संयुक्त चिकित्सालय, चकिया पर हैरान करने वाले आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल कर्मियों ने मामूली इंजेक्शन के नाम पर न केवल पैसे वसूले, बल्कि आयुष्मान कार्ड से 1870 रुपये की कटौती भी कर डाली।
मामूली इंजेक्शन पर हजारों की वसूली
पीड़ित का कहना है कि उसे बिल्ली ने काट लिया था। इलाज के लिए वह जिला संयुक्त चिकित्सालय, चकिया पहुँचा, जहाँ उसे केवल एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन लगना था। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने इलाज का बहाना बनाकर उससे आयुष्मान कार्ड पर अंगूठा लगवा लिया। बाद में उसे पता चला कि कार्ड से 1870 रुपये काट लिए गए, जबकि असलियत में केवल एक साधारण इंजेक्शन दिया गया था।
शिकायत पर भी नहीं हुई सुनवाई
भुक्तभोगी ने इस मामले की शिकायत अस्पताल के सीएमएस से की, लेकिन उसकी सुनवाई तक नहीं हुई। उल्टा उसे टरका दिया गया। न्याय न मिलने से निराश होकर उसने पूरा मामला लिखित रूप से उपजिलाधिकारी (एसडीएम) चकिया के सामने प्रस्तुत किया।
एसडीएम ने मामले की जांच कराने का भरोसा तो दिलाया है, लेकिन घटना ने गरीब मरीजों के बीच गहरी नाराज़गी और अविश्वास की स्थिति पैदा कर दी है।
ग्रामीणों में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब साधारण इंजेक्शन पर ही हजारों रुपये की वसूली हो रही है, तो फिर गंभीर ऑपरेशन और बड़े इलाज के नाम पर कितना बड़ा खेल खेला जा रहा होगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
लोगों का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड योजना गरीबों के लिए राहत नहीं, बल्कि लूट का जरिया बनती जा रही है।
सरकार के दावों पर सवाल
आयुष्मान भारत योजना को गरीबों और वंचितों को मुफ्त इलाज दिलाने की सबसे बड़ी पहल बताया जाता है। इसके तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने का दावा है। लेकिन चकिया में सामने आया यह मामला योजना की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।













