जशपुरनगर। धान उपार्जन केंद्र कोनपारा (तुमला) में सामने आए 6.55 करोड़ रुपये के बहुचर्चित धान घोटाले में फरार चल रहा मुख्य आरोपी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया। समिति प्रबंधक जयप्रकाश साहू को जशपुर पुलिस ने कोरबा से गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहा यह शातिर आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था और पहचान छिपाने के लिए दूसरे के नाम के सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था, लेकिन तकनीकी निगरानी और सटीक रणनीति के आगे उसकी चालाकी काम नहीं आई।
पुलिस जांच में सामने आया कि खरीफ वर्ष 2024-25 में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कोनपारा में कागजों पर 1,61,250 क्विंटल धान की खरीदी दिखाई गई, लेकिन जब भौतिक सत्यापन हुआ तो 20,586.88 क्विंटल धान गायब मिला। इतना ही नहीं, 4,898 नए-पुराने बारदानों का भी गबन किया गया। इस तरह शासन को कुल 6 करोड़ 55 लाख 26 हजार 979 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। अपेक्स बैंक के नोडल अधिकारी की रिपोर्ट पर थाना तुमला में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
एफआईआर के बाद से ही जयप्रकाश साहू फरार था। पहले वह मध्य प्रदेश के दमोह में छिपा रहा, फिर पुलिस की भनक लगते ही कोरबा के कुसमुंडा क्षेत्र में जा छिपा। पुलिस के अनुसार, वह हर बार नए सिम कार्ड और अलग-अलग मोबाइल का इस्तेमाल कर लोकेशन ट्रेस होने से बचता रहा, लेकिन साइबर यूनिट की तकनीकी पड़ताल ने आखिरकार उसकी मौजूदगी पकड़ ली। घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले में पुलिस पहले ही एक अन्य आरोपी फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव को जेल भेज चुकी है। एसएसपी जशपुर शशि मोहन सिंह ने बताया कि घोटाले में शामिल अन्य चार फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि धान उपार्जन में हुई इस बड़ी अनियमितता के हर दोषी को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
इस कार्रवाई में एसडीओपी पत्थलगांव डॉ. ध्रुवेश कुमार जायसवाल, थाना प्रभारी तुमला कोमल सिंह नेताम, एएसआई टेकराम सारथी और साइबर यूनिट की अहम भूमिका रही। करोड़ों के इस घोटाले के खुलासे और मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि आर्थिक अपराधों पर अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी।









