जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने जशपुर जिले के कृषि और ग्रामीण विकास को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बीते दो वर्षों में जिले के किसानों के हित में 11 महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, जिन पर कुल 199 करोड़ 49 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। इन योजनाओं के पूरा होने से जिले के हजारों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और कृषि उत्पादन के साथ-साथ उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप जशपुर जिले में बैराज, एनीकट, तालाब तथा व्यपवर्तन योजनाओं के निर्माण, मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्यों को मंजूरी दी गई है। इनमें मैनी नदी बगिया स्थित बैराज उद्वहन सिंचाई योजना के लिए 79 करोड़ 37 लाख रुपये, कुनकुरी ईब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के लिए 37 करोड़ 9 लाख रुपये तथा पमशाला एनीकट योजना के लिए 28 करोड़ 2 लाख रुपये की स्वीकृति प्रमुख रूप से शामिल है।
इसके अलावा सहसपुर तालाब योजना के लिए 4 करोड़ 27 लाख रुपये, डुमरजोर (डुमरिया) व्यपवर्तन योजना के लिए 10 करोड़ 36 लाख रुपये, तुबा एनीकट योजना के लिए 2 करोड़ 67 लाख रुपये और बारो एनीकट योजना के लिए 7 करोड़ 6 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। मेडरबहार तालाब योजना को 5 करोड़ रुपये, कोनपारा तालाब (दलटोली डेम) के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 47 लाख रुपये तथा अंकिरा तालाब के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के लिए भी 3 करोड़ 47 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। वहीं कोकिया व्यपवर्तन योजना के लिए 16 करोड़ 17 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
इन सिंचाई परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जशपुर जिले के अनेक गांवों में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित होगी। इससे किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम होगी और खेती को एक स्थायी तथा भरोसेमंद आजीविका का साधन बनाया जा सकेगा। बेहतर जल प्रबंधन से फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सिंचाई, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। जशपुर जिले को मिली ये सिंचाई सौगातें सुशासन के दो वर्षों में विकास की मजबूत नींव का प्रमाण हैं। इन योजनाओं से जिले के किसानों में उत्साह और उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।









