गरियाबंद। आदिवासी कल्याण विभाग में बगैर लिखित आदेश भर्ती किए गए 500 से अधिक दैनिक वेतनभोगियों को अचानक बाहर का रास्ता दिखाए जाने से विभाग में हड़कंप मच गया है। छात्रावास और आश्रमों में स्वीकृत पदों से दोगुनी संख्या में कर्मियों की नियुक्ति नेता और अफसरों को खुश करने के लिए की गई थी, लेकिन कलेक्टर भगवान सिंह उइके के अचानक जारी आदेश ने इन कर्मचारियों के लिए संकट की घंटी बजा दी।
कलेक्टर का आदेश और विभागीय कार्रवाई
13 जनवरी 2026 को कलेक्टर ने आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि ट्राइबल विभाग के संस्थानों में 2014 में तय स्वीकृत सेटअप के अतिरिक्त कर्मचारी कार्यरत हैं। आदेश में निर्देश था कि प्रत्येक संस्थान के अधीक्षकों को प्रति माह 5 तारीख तक पदस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति का प्रतिवेदन भेजना होगा। इस आदेश के बाद अधीक्षकों ने मौखिक रूप से 519 अतिरिक्त कर्मचारियों को काम पर आने से मना कर दिया।
कर्मियों का विरोध और घेराव की तैयारी
इस अचानक कार्रवाई को अन्यायपूर्ण मानते हुए प्रभावित दैनिक वेतनभोगियों ने विरोध का मोर्चा खोल दिया। कर्मचारियों ने 17 और 27 जनवरी को कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर तीसरा पत्र भेजकर 30 जनवरी को कलेक्टोरेट घेराव की चेतावनी दी है।
संघ के जिला अध्यक्ष ने कहा, “पिछले 8-9 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। नए भर्ती वाले 150 कर्मियों को अब तक 8 माह का वेतन भी नहीं मिला है। अचानक हटाने से परिवार का गुजारा प्रभावित होगा। बेरोजगारी से आर्थिक और मानसिक स्थिति बिगड़ सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।”
नेताओं और अफसरों के लिए नियुक्तियों का आरोप
कर्मचारी डोमार ने आरोप लगाया कि बिना किसी लिखित आदेश के भर्ती किए गए लगभग 40 कर्मियों की ड्यूटी कलेक्टर, एसडीएम, आयुक्त, ट्राइबल मंत्री और जज के बंगले में लगाई गई। इनमें से कुछ को नियमित वेतन भी मिल रहा है, जबकि हॉस्टलों में निस्वार्थ भाव से ड्यूटी करने वाले कर्मियों को कई माह से वेतन नहीं दिया गया।
2019 में रिक्त पदों पर नियमितीकरण के बाद जिले के छात्रावास-आश्रम में 369 अतिरिक्त कर्मी कार्यरत थे। कोरोना काल के बाद 2022 से मौखिक आदेशों के तहत 150 कर्मचारियों को नियुक्त किया गया। नौकरी पाने के लिए कई गरीब बेरोजगारों ने जमीन और जेवर गिरवी रखकर डेढ़ से दो लाख रुपए तक खर्च किए। कई बड़े जनप्रतिनिधियों के प्रभाव से नियुक्ति पाए, लेकिन कई अब भी पैसे देने के बाद नौकरी से वंचित हैं। तीन कर्मियों ने इस मामले में एक कांग्रेस नेता के खिलाफ ठगी का मामला सीटी कोतवाली में दर्ज कराया।
विभाग की स्थिति और आदेश का पालन
सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग लोकेश्वर पटेल ने बताया कि कलेक्टर के आदेश के अनुसार केवल स्वीकृत पदों के कर्मचारियों की उपस्थिति का प्रतिवेदन ही स्वीकार किया जाएगा। अतिरिक्त कर्मचारियों को बगैर लिखित आदेश काम करने से मना किया गया है। उन्होंने कहा, “कर्मचारियों की संख्या और स्थिति का आकलन कर ही आगे जानकारी दी जाएगी।”
आज कलेक्टोरेट का घेराव
प्रभावित दैनिक वेतनभोगी आज कलेक्टोरेट पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। कर्मचारियों का कहना है कि वे न्याय और वेतन भुगतान की मांग करते हैं। विभाग और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं।













