जयपुर। आयोजित तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा सम्मेलन में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जब उनके नाम से फर्जी वेबसाइट और डिजिटल प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगा जा सकता है, तो आम नागरिकों के लिए खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। उन्होंने साइबर अपराध को केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित न मानते हुए इसे न्याय व्यवस्था, संस्थागत विश्वसनीयता और समाज के विश्वास के लिए भी गंभीर चुनौती बताया।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए सीजेआई ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि लगभग हर दूसरे दिन उनके नाम से कोई न कोई फर्जी वेबसाइट या डिजिटल प्रोफाइल सामने आ जाती है। इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को फर्जी संदेश भेजने और उनसे पैसे ऐंठने के लिए करते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी बहन और बेटी को भी उनके नाम से बनाए गए फर्जी प्लेटफॉर्म से संदेश प्राप्त हुआ था। जांच में यह सामने आया कि ऐसे कई प्लेटफॉर्म विदेशी नेटवर्क, खासतौर पर नाइजीरिया से संचालित किए जा रहे हैं, जो साइबर अपराध की वैश्विक और जटिल प्रकृति को दर्शाता है।
सीजेआई ने कहा कि साइबर अपराध अब सीमाओं से परे हो चुका है और इसका प्रभाव हर वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि देशभर में साइबर ठगी से जुड़ी लाखों शिकायतें लंबित हैं, जो इस समस्या की भयावहता को दर्शाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल पुलिस या अदालत की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार, तकनीकी संस्थानों और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है कि वे डिजिटल सुरक्षा के प्रति सजग रहें।
उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि हाल के समय में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और वीडियो कॉल के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। ऐसे मामलों में डराकर पैसे मांगना सीधा-सीधा साइबर फ्रॉड का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि पीड़ितों के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचाती हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को भी गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि डीपफेक वीडियो किसी भी व्यक्ति की छवि, सम्मान और आजीविका तक को नुकसान पहुंचा सकते हैं। डिजिटल दुनिया में तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से अपराध के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए कानूनी और तकनीकी दोनों स्तर पर ठोस व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने आम नागरिकों को विशेष रूप से आगाह करते हुए कहा कि झटपट लोन, ट्रैफिक चालान, केवाईसी अपडेट, पार्सल डिलीवरी या बैंक अलर्ट के नाम पर आने वाले लिंक साइबर ठगी का सबसे आम माध्यम बन चुके हैं। ठग इन संदेशों के जरिए लोगों को जल्दबाजी या डर की स्थिति में डालते हैं और लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाते हैं। एक बार लिंक खुलते ही मोबाइल या बैंक खाते से जुड़ी संवेदनशील जानकारी ठगों तक पहुंच सकती है। उन्होंने साफ कहा कि बैंक या कोई भी सरकारी विभाग कभी भी लिंक भेजकर निजी जानकारी नहीं मांगता, इसलिए ऐसे संदेशों से पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए।
ओटीपी आधारित ठगी को लेकर भी उन्होंने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ठग अक्सर खुद को बैंक अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी या कस्टमर केयर एजेंट बताकर फोन करते हैं और ओटीपी, एटीएम पिन या यूपीआई पिन पूछते हैं। उन्होंने दोहराया कि कोई भी बैंक या संस्था फोन पर ओटीपी नहीं मांगती। ओटीपी साझा करना सीधे तौर पर बैंक खाते से पैसे निकल जाने का खतरा पैदा करता है।
डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच उन्होंने सुझाव दिया कि लोग अपने बैंक और यूपीआई खातों पर अलर्ट नोटिफिकेशन अवश्य चालू रखें, ताकि किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत मिल सके। इससे समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही मोबाइल में ऐप डाउनलोड करते समय भी सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई। उन्होंने कहा कि केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप इंस्टॉल करें और किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि ये ऐप फोन का पूरा नियंत्रण ठगों को दे सकते हैं।
सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी उन्होंने गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर अपनी निजी जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, पता और परिवार से जुड़ी बातें सार्वजनिक रूप से साझा कर देते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठग फर्जी प्रोफाइल बनाकर या सोशल इंजीनियरिंग के जरिए ठगी में करते हैं। उन्होंने सलाह दी कि मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें और समय-समय पर उन्हें बदलते रहें, ताकि डिजिटल सुरक्षा मजबूत बनी रहे।
सीजेआई ने यह भी कहा कि साइबर ठगी का सबसे बड़ा शिकार बुजुर्ग, कम डिजिटल जानकारी रखने वाले लोग और नए इंटरनेट यूजर्स बन रहे हैं। इसलिए परिवार के जिम्मेदार सदस्यों को चाहिए कि वे अपने घर के बुजुर्गों और बच्चों को समय-समय पर जागरूक करते रहें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार है।
यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए, तो तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में शिकायत दर्ज होने पर पैसा वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है, जबकि देर होने पर नुकसान की भरपाई मुश्किल हो जाती है।
अपने संबोधन के अंत में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल युग में सतर्कता, संयम और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। लालच, डर और जल्दबाजी साइबर ठगों के सबसे बड़े हथियार हैं। यदि नागरिक इन तीनों से बचते हुए हर संदेश, कॉल और लिंक की सत्यता परखें, तो साइबर ठगी के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।













