अनिरुद्ध की कलम से
आज के डिजिटल युग में साइबर अपराधी लगातार अपने हथकंडे बदल रहे हैं। अब ठग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर लोगों को विश्वास में लेकर लाखों रुपये हड़प रहे हैं। सबसे खतरनाक पहलू यह है कि ये ठग खुद को फर्जी पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी, या निवेश सलाहकार बताकर भोले-भाले लोगों को फँसा रहे हैं।
बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा खतरा
उम्र के अंतिम पड़ाव में लोग अक्सर अकेलेपन से जूझते हैं। ऐसे में कई बुजुर्ग सोशल मीडिया पर दोस्ती के लिए साथी खोजते हैं। कम उम्र की लड़कियों की आकर्षक प्रोफाइल देखकर वे झांसे में आ जाते हैं और धीरे-धीरे ठगी का शिकार हो जाते हैं।
- सोशल मीडिया पर नकली प्रोफाइल
- चैट और वीडियो कॉल से विश्वास जीतना
- फिर धीरे-धीरे पैसों की मांग
यही पैटर्न इन दिनों सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।
हालिया बड़े मामले
- बिहार: अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी, प्राइवेट बैंक को निशाना बनाकर 251 खातों से 5.58 करोड़ रुपये उड़ाए गए।
- गाजीपुर: फर्जी वेबसाइट से 1 करोड़ की ठगी, 500 से ज्यादा लोग शिकार बने।
- दिल्ली: फेक ट्रेडिंग चैनल के जरिये करोड़ों की ठगी, पुलिस ने एक इंजीनियर को गिरफ्तार किया।
- बनारस: महिला के साथ ऑनलाइन लाखों की ठगी हुई, मुकदमा दर्ज है लेकिन आरोपी अभी तक पकड़ से बाहर।
- रायपुर: शेयर बाजार और क्रिप्टो निवेश का झांसा देकर ऑनलाइन घोटाला, पुलिस ने आरोपी को दबोचा।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
- दिल्ली में अकेले 2024 में साइबर ठगी से ₹800 करोड़ से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया।
- बिहार में पिछले तीन वर्षों में साइबर अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। सरकार ने निगरानी के लिए ‘थर्ड आई सिस्टम’ शुरू करने की घोषणा की है।
यह क्यों गंभीर है?
यह सभी घटनाएं इस बात की चेतावनी हैं कि अब साइबर अपराधी AI, क्लोनिंग, डीपफेक, फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया स्कैम जैसे नए हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये अपराध किसी एक राज्य या शहर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में फैल चुके हैं।
सावधानियां
असली स्रोत की पुष्टि करें
- किसी भी कॉल, ईमेल या लिंक पर तुरंत भरोसा न करें।
- बैंक या पुलिस अधिकारी बनकर मांगी गई जानकारी की पुष्टि सीधे आधिकारिक हेल्पलाइन से करें।
अनुसंधान और जांच करें
- निवेश प्लेटफॉर्म, ट्रेडिंग चैनल या AI-आधारित सेवाओं की सच्चाई जांचें।
- गूगल पर कंपनी/प्लेटफॉर्म का रिव्यू जरूर देखें।
शिकायत दर्ज करें
- साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें।
- या cybercrime.gov.in पर जाकर शिकायत दर्ज करें।
- पुलिस और साइबर सेल कई मामलों में रकम वापस कराने में मदद कर चुकी है।
निष्कर्ष यही है कि डिजिटल दौर में जितनी सुविधाएँ बढ़ रही हैं, उतना ही खतरा भी। जागरूक रहना, सावधान रहना और समय पर शिकायत करना ही सबसे बड़ा बचाव है।









