चंदौली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर चंदौली पहुंचे। उनका आगमन न सिर्फ प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी खासा महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान डिप्टी सीएम ने गोधना मोड़ स्थित रमादेवी हॉस्पिटल में भदोही से सांसद डॉ. बिनोद बिंद से मुलाकात की, जो करीब आधे घंटे तक चली। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
डिप्टी सीएम मौर्य दोपहर लगभग 4 बजे अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने सांसद डॉ. बिनोद बिंद की तबीयत का हालचाल लिया और प्रदेश की विकास योजनाओं, विधायी गतिविधियों, और सामाजिक मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की। यह मुलाकात सामान्य शिष्टाचार से कहीं ज्यादा गहराई लिए नजर आई, क्योंकि दोनों नेताओं के बीच कई ऐसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ जो सीधे तौर पर आगामी चुनावी रणनीतियों से भी जुड़े हो सकते हैं।
इस मुलाकात के दौरान डिप्टी सीएम ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए कहा,
“उत्तर प्रदेश अब माफिया और अपराधियों की शरणस्थली नहीं रहा। अपराधी पाताल में भी छिप जाएं, तो यूपी पुलिस उन्हें निकाल लाएगी।”
इसके साथ ही उन्होंने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन करते हुए कहा,
“भारतीय सेना हर आतंकी गतिविधि का मुंहतोड़ जवाब दे रही है। सीमाओं की सुरक्षा मजबूत है और देश के दुश्मनों को उनके ही घर में घुसकर जवाब दिया जा रहा है।”
इस मौके पर डिप्टी सीएम के साथ विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) हंस लाल विश्वकर्मा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कौशलेंद्र सिंह, भाजपा नेता अवधेश पटेल, धर्मेंद्र यादव समेत कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती थी। पूरे अस्पताल को छावनी में तब्दील कर दिया गया था और आमजन की आवाजाही पर कुछ समय के लिए नियंत्रण भी रखा गया।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो डिप्टी सीएम और भदोही सांसद के बीच यह मुलाकात सिर्फ सामाजिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि इसके पीछे आगामी 2027 विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव की संभावित रणनीतियों को लेकर विचार-विमर्श की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
भदोही और चंदौली जैसे सीमावर्ती जिलों में दलित, पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग की मजबूत राजनीतिक पकड़ है, और दोनों ही नेता इन वर्गों के प्रभावशाली प्रतिनिधि माने जाते हैं। ऐसे में यह मुलाकात भाजपा की आगामी रणनीति में सामाजिक समीकरणों को साधने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
डिप्टी सीएम का यह दौरा राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम रहा क्योंकि हाल के दिनों में पूर्वांचल में भाजपा की पकड़ को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे में संगठन स्तर पर मजबूती और व्यक्तिगत संवादों के माध्यम से मतदाताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश भाजपा की ओर से जारी है।
अंततः, उपमुख्यमंत्री की यह चंदौली यात्रा प्रशासनिक व्यस्तताओं से ज्यादा राजनीतिक संकेतों से भरपूर रही, जो आने वाले समय में क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।













