गड़चिरोली। महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब लाहेरी गांव की सरकारी आश्रमशाला में भोजन के बाद छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। प्रार्थना सभा के दौरान एक छात्र को उल्टी और पेट दर्द शुरू हुआ और देखते ही देखते कई छात्र चक्कर व घबराहट की शिकायत करने लगे। कुछ ही देर में करीब 70 छात्रों को विषबाधा (फूड पॉइजनिंग) के लक्षण दिखाई देने लगे, जिन्हें आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया।
यह घटना भामरागड़ तहसील अंतर्गत लाहेरी गांव स्थित सरकारी माध्यमिक एवं कनिष्ठ महाविद्यालय की आश्रमशाला की है, जहां लगभग 230 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। बुधवार सुबह नाश्ते/भोजन के बाद करीब 10:30 बजे प्रार्थना और परिपाठ चल रहा था, तभी एक छात्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई। शिक्षकों ने तत्काल उसे लाहेरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, लेकिन कुछ ही समय में अन्य छात्रों में भी समान लक्षण दिखने लगे।
47 छात्रों को ग्रामीण अस्पताल किया गया रेफर
स्थिति बिगड़ती देख कुल 70 छात्रों को उपचार के लिए विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया। इनमें से 47 छात्रों की हालत को देखते हुए उन्हें भामरागड़ के ग्रामीण अस्पताल रेफर किया गया, जबकि दो छात्रों की स्थिति गंभीर होने पर अहेरी के उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल सभी छात्र डॉक्टरों की निगरानी में हैं और प्रशासन के अनुसार सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलते ही एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प के प्रकल्प अधिकारी अमर राऊत, तहसीलदार किशोर बागडे और सहायक प्रकल्प अधिकारी रोशन चव्हाण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने डॉक्टरों से छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और आश्रमशाला के शेष छात्रों की भी तत्काल स्वास्थ्य जांच कराई गई।
विषबाधा के कारणों की जांच शुरू
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि वर्तमान में 23 छात्र लाहेरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में, 45 छात्र भामरागड़ ग्रामीण अस्पताल में और 2 छात्र अहेरी उपजिला अस्पताल में उपचाराधीन हैं। फूड पॉइजनिंग के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। भोजन के नमूनों की जांच और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है।













