चंदौली। लगातार कई दिनों से हो रही भारी बारिश ने जिले में तबाही मचा दी है। गढ़ई और चंद्रप्रभा नदियां उफान पर हैं और इनका विकराल रूप कई गांवों के किसानों के लिए आफ़त बन गया है। नदियों की समय पर सफाई और जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से हजारों एकड़ धान और मक्का की फसलें पूरी तरह जलमग्न होकर बर्बाद हो गई हैं। हालात से परेशान किसानों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा और उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को घेरकर जवाब तलब किया।
फसलों के डूबने से किसानों की नाराज़गी
मुगलसराय तहसील अंतर्गत पांडेयपुर, बुधवार, पचोखर, चंदाईत, हसनपुर और बौरी गांवों के सैकड़ों किसान एकत्र हुए और अधिकारियों से सीधे सवाल किए। किसानों का कहना था कि यदि समय रहते नदियों की सफाई और निकासी का इंतज़ाम किया गया होता, तो उनकी मेहनत और पूंजी बर्बाद न होती।
किसानों ने विशेष रूप से गोधन मोड़ से लेवा तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 1.7 किलोमीटर लंबे पुराने गढ़ई नाले को पीडब्ल्यूडी विभाग ने मिट्टी से पाट दिया, जिसके कारण पानी खेतों में भर गया और जल निकासी का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
पूर्व जिला अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह का बयान
मौके पर पहुंचे भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने किसानों की मांग का समर्थन करते हुए कहा:
“यह विभाग की घोर लापरवाही है। किसानों की मेहनत की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन तुरंत जल निकासी की व्यवस्था कराए और जिन किसानों की फसलें डूबी हैं उन्हें तत्काल उचित मुआवज़ा दिया जाए।”
उन्होंने प्रशासन को चेताया कि यदि इस मामले में ढिलाई बरती गई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
किसानों की चेतावनी
ग्रामीण किसानों ने एक स्वर में कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। उनका कहना था कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
मौके पर मौजूद प्रमुख लोग:
प्रधान सतीष सिंह, रामासरे मौर्य, जनार्दन सिंह, पप्पू सिंह, मंगल सिंह, मुबारक बिंद सहित सैकड़ों किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
विशेष संवाददाता- गनपत राय













