चंदौली – कटेसर। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। वाराणसी के डोमरी, कोदोपुर और रामनगर के रास्ते होते हुए गंगा का प्रवाह कटेसर गांव के निचले पुरवों तक पहुंच चुका है। रात के अंधेरे में बाढ़ का पानी घरों और डेरों में घुस आया, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई।
पशुओं की जान बचाने की मशक्कत
गांव के गाय-भैंसों को खूंटों से बांधकर रखा गया था, लेकिन पानी के तेज बहाव को देखते हुए सुबह ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर उन्हें सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया। पशुपालक पेड़ा यादव, मुन्ना यादव, सुनील पटेल, अमरनाथ यादव और सतीश पटेल ने बताया कि पशुओं को लेकर बहुत परेशानी हो रही है — न रहने की जगह है, न चारे की व्यवस्था। साथ ही खड़ी फसलें भी पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं।
उद्योगों को भी खतरा
अर्श डिटर्जेंट पाउडर के निर्माता कटेसर निवासी अजय प्रकाश राय ने बताया कि रात में सोते समय बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि पानी इतना बढ़ जाएगा। सुबह आंख खुली तो देखा कि कारखाने के पास तक पानी पहुंच चुका है और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि कारखाने का सारा कच्चा माल और तैयार सामान कहां शिफ्ट करें? समय बहुत कम है और जोखिम लगातार बढ़ रहा है।
प्रशासन से राहत की गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि अब तक प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिली है। न तो राहत शिविर, न पशुओं की व्यवस्था, और न ही चारा या दवा की कोई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है, और अगर तुरंत कोई मदद नहीं मिली, तो हालात और भी बदतर हो सकते हैं।
गांव के लोग अब चंदौली प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि:
- बाढ़ राहत सामग्री तत्काल भेजी जाए
- पशुओं के लिए चारे और दवा की व्यवस्था हो
- उद्योग और फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर सहायता दी जाए
- स्थायी राहत केंद्रों की स्थापना की जाए
विशेष संवाददाता- गनपत राय













