चंदौली। बरहनी क्षेत्र की मिट्टी से निकले Chandan Singh Rajput आज पूर्वांचल की राजनीति में एक मजबूत और उभरते हुए चेहरे के तौर पर देखे जा रहे हैं। देश की सेवा में वर्षों तक समर्पित रहने के बाद अब वह जनता की समस्याओं को अपना मिशन बनाकर सक्रिय राजनीति में तेजी से अपनी पकड़ बना रहे हैं।
साधारण परिवार में जन्मे चंदन सिंह ने जीवन की शुरुआती चुनौतियों को अवसर में बदला। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने Indian Army जॉइन की और करीब 18 साल तक देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई। फौजी जीवन ने उन्हें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और जमीनी समझ दी, जो अब उनके राजनीतिक सफर में साफ दिखाई देती है।
राजनीति में एंट्री: सेवा से नेतृत्व तक
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने समाज के बीच रहकर काम करने का निर्णय लिया। लोगों की समस्याओं को समझते हुए उन्होंने राजनीति को बदलाव का माध्यम बनाया और Nishad Party से जुड़कर संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
वर्तमान में वे पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और वाराणसी मंडल के सह-समन्वयक के रूप में कार्य कर रहे हैं। गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद करना और संगठन को मजबूत करना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा बन चुका है।
जनता के मुद्दे ही असली एजेंडा
चंदन सिंह राजपूत का फोकस साफ है—जमीन से जुड़े मुद्दे। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर वह लगातार सक्रिय रहते हैं। खासकर युवाओं और पिछड़े वर्गों की आवाज उठाने में उनकी भागीदारी उन्हें एक अलग पहचान दिला रही है।
उनकी सभाओं में बढ़ती भीड़ यह दर्शाती है कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। लोग उन्हें ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं जो सिर्फ वादे नहीं, बल्कि सीधे संवाद और समाधान में विश्वास रखते हैं।
2027 चुनाव: क्या सियासत में बड़ा कदम?
आगामी Uttar Pradesh Legislative Assembly Election 2027 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। चर्चाएं हैं कि चंदन सिंह राजपूत सैयदराजा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
इस सीट पर निषाद, बिंद और मल्लाह समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जिससे उनके पक्ष में समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। यदि पार्टी और गठबंधन का समर्थन मिलता है, तो मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है।
एक भरोसेमंद चेहरे की ओर बढ़ते कदम
चंदन सिंह राजपूत की छवि एक सरल, सुलभ और जमीन से जुड़े नेता की बन रही है। वे लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और समाधान के लिए प्रयास करते हैं। यही कारण है कि पूर्वांचल की राजनीति में उनका कद लगातार बढ़ता दिख रहा है।













