चंदौली। धानापुर विकासखंड में गंगा नदी की धारा लगातार गांवों को अपनी चपेट में ले रही है। कटान का दायरा इतना बढ़ गया है कि कई परिवार अपनी पीढ़ियों से जोती जा रही जमीनें खो चुके हैं। स्थानीय किसानों के मुताबिक इस साल कटान ने पहले से अधिक नुकसान पहुंचाया है।
गंगा के किनारे बसे नौघरा, बुद्धपुर, प्रसहता, दिया और गुरैनी गांव कटान की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं। नौघरा गांव की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां गंगा कभी किलोमीटरों दूर बहती थी लेकिन अब कुछ ही मीटर की दूरी पर जमीन को काट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो गांव का बड़ा हिस्सा भविष्य में नदी में समा सकता है।
धानापुर के किसान लगातार अपनी जमीनें कटते देख हताश हैं। बुद्धपुर के राजू सिंह बताते हैं कि गंगा ने उनकी लगभग ढाई बीघा कृषि भूमि निगल ली है और कटाव का रुख अभी भी नहीं थमा है। उनका कहना है कि वर्षों से अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
नौघरा के राकेश यादव कहते हैं कि जैसे ही गंगा का जलस्तर नीचे जाता है, कटान और तेज हो जाता है। किसानों के मुताबिक पिछले दो दशक से वे कटाव निरोधक उपायों की मांग कर रहे हैं, लेकिन मौके पर न तो कोई बंधा बना है और न ही कोई सुरक्षा दीवार तैयार की गई है।
किसानों की जमीनें लगातार नदी में समाने के बावजूद, प्रशासन की कार्रवाई अभी भी कागजों तक सीमित दिखती है। करीब एक माह पहले पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने क्षेत्र का दौरा कर ग्रामीणों की समस्या सुनी थी, लेकिन पारिवारिक कारणों से आगे की कार्रवाई रुक गई। इस दौरान, हजारों बीघा जमीन अब भी गंगा के तेज कटान की जद में है।









