चंदौली। चंदौली पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो बेरोजगार युवाओं को “पुलिस मित्र” और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर राष्ट्रव्यापी स्तर पर ठगी कर रहा था। यूट्यूब से फर्जी भर्ती प्रक्रिया का तरीका सीखकर इस गिरोह ने एक संगठित नेटवर्क तैयार किया और उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों के युवाओं को अपना निशाना बनाया। पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के कुशल निर्देशन में चंदौली कोतवाली पुलिस ने इस गिरोह के चार प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके पास से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, विभागीय वर्दी, लैपटॉप, और नकदी बरामद की है।
यूट्यूब से सीखा ठगी का तरीका, बनाया अपना नेटवर्क
मामले का खुलासा तब हुआ जब ठगी के शिकार कुछ युवकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने तकनीकी और मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए मझवार रेलवे स्टेशन के पास से चार अभियुक्तों को धर दबोचा।
पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह हैरान करने वाली थी। गिरोह के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब पर फर्जी भर्ती प्रक्रियाओं के वीडियो देखकर ठगी का यह तरीका सीखा। इसके बाद उन्होंने जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर “पुलिस मित्र” जैसे पदों पर भर्ती का झांसा देकर अपना जाल फैलाना शुरू किया।
ऐसे फंसाते थे बेरोजगारों को
गिरोह का सरगना अशोक सम्राट (निवासी मुजफ्फरपुर, बिहार, वर्तमान पता दिल्ली) अपने साथियों संजीव कुमार (गोमतीनगर, लखनऊ), आशीष कुमार (कासगंज), और आनन्द चौहान (कासगंज) के साथ मिलकर काम करता था। ये लोग पहले बेरोजगार युवाओं का डेटा इकट्ठा करते और फिर उनसे संपर्क साधते। उन्हें यकीन दिलाया जाता था कि उनकी सीधी भर्ती करवाई जाएगी। विश्वास जमाने के लिए वे चंदौली के अरविंद वाटिका जैसे सार्वजनिक स्थानों पर आवेदकों को बुलाते थे और उनका फर्जी इंटरव्यू लेते थे।
कानपुर में दी जाती थी फर्जी ट्रेनिंग
चयनित अभ्यर्थियों से नौकरी के नाम पर 1 लाख से 2.5 लाख रुपये तक वसूले जाते थे, जिनका भुगतान अधिकतर ऑनलाइन माध्यम से लिया जाता था। इसके बाद, विश्वास को और पुख्ता करने के लिए, इन युवाओं को ट्रेनिंग के लिए कानपुर भेजा जाता था। कानपुर में एक किराए के लॉन में कुछ दिनों की फर्जी ट्रेनिंग दी जाती थी, जहाँ उन्हें अनुशासन और कुछ बुनियादी बातें सिखाई जाती थीं। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र, आईडी कार्ड और विभागीय वर्दी तक दी जाती थी, ताकि उन्हें यकीन हो जाए कि उनकी सरकारी नौकरी लग चुकी है।
पीड़ितों ने सुनाई आपबीती
एक पीड़ित चंद्रभान मौर्य ने बताया कि गिरोह ने उनसे और उनके कई साथियों से कुल मिलाकर 5.45 लाख रुपये की ठगी की। उन्हें पहले चंदौली बुलाया गया, फिर कानपुर में ट्रेनिंग दी गई और अंत में नियुक्ति पत्र देने के नाम पर और पैसों की मांग की जाने लगी। जब उन्हें शक हुआ और उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो गिरोह के सदस्य टालमटोल करने लगे, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क साधा।
- भारी मात्रा में फर्जी सामान बरामद
- पुलिस ने गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से:
- फर्जी नियुक्ति पत्र और आईडी कार्ड
- विभिन्न विभागों की नकली मुहरें
- एक लैपटॉप, एक टैबलेट और कई मोबाइल फोन
- नकद ₹73,000
विभागीय यूनिफॉर्म
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने बताया कि यह एक संगठित गिरोह है और इसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “गिरफ्तार अभियुक्तों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और ठगी के शिकार हुए और पीड़ितों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। हम युवाओं से अपील करते हैं कि वे नौकरी के ऐसे किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव से सावधान रहें और किसी भी भर्ती प्रक्रिया की सत्यता को आधिकारिक वेबसाइटों पर जरूर जांचें।”













