लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने राज्य की चुनावी तस्वीर को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। शुक्रवार को जारी फाइनल लिस्ट के मुताबिक प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या अब 13.39 करोड़ रह गई है, जो पहले के मुकाबले लगभग 13 प्रतिशत कम है। इस प्रक्रिया के दौरान 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, जबकि 84 लाख नए नाम जोड़े गए हैं।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले अक्टूबर 2025 में प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे। SIR प्रक्रिया के तहत गहन सत्यापन शुरू हुआ, जिसके बाद जनवरी 2026 में जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई थी। यानी पहली सूची में ही 2.89 करोड़ नाम हटा दिए गए थे। इसके बाद दावे-आपत्तियों और पुनः सत्यापन के आधार पर 84 लाख नाम वापस जोड़े गए और अंतिम सूची 13.39 करोड़ पर स्थिर हुई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाना था। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए जो या तो फर्जी थे, दो जगह दर्ज थे, या फिर संबंधित व्यक्ति अब उस स्थान पर रह ही नहीं रहा था।
अगर जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो राजधानी लखनऊ में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। यहां कुल 9.14 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक है। इसके अलावा प्रयागराज में 8.26 लाख, कानपुर नगर में 6.87 लाख, आगरा में 6.37 लाख और गाजियाबाद में 5.74 लाख नाम हटाए गए हैं।
प्रतिशत के लिहाज से भी कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव हुआ है। लखनऊ कैंट विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 34.18 प्रतिशत मतदाता घटे हैं। वहीं गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट पर संख्या के आधार पर सबसे अधिक 3.16 लाख नाम कम हुए हैं। यह वही सीट है जहां पिछले चुनाव में भारी मतों से जीत दर्ज की गई थी, ऐसे में यह बदलाव राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
अंतिम मतदाता सूची के विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 13,39,84,792 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इनमें 7,30,71,061 पुरुष (54.54%), 6,09,09,525 महिलाएं (45.46%) और 4,206 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। जेंडर रेशियो 834 दर्ज किया गया है, जो पहले की तुलना में थोड़ा बेहतर है। 18-19 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या 17,63,360 है, जो कुल मतदाताओं का 1.32 प्रतिशत है।
चुनाव आयोग के अनुसार नाम हटाने के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आए हैं। करीब 3.50 लाख नाम ऐसे थे जिनमें जानकारी गलत पाई गई। 3.28 लाख मतदाता सत्यापन के दौरान गैर-मौजूद पाए गए। लगभग 79 हजार नाम डुप्लीकेट थे, यानी एक व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज था। इसके अलावा 55,865 मतदाता मृत पाए गए और 2,269 ऐसे नाम भी मिले जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी, इसलिए उन्हें सूची से हटाया गया।
वहीं दूसरी ओर कुछ जिलों में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि भी दर्ज की गई है। प्रयागराज में सबसे ज्यादा 3.29 लाख नए नाम जुड़े, जबकि लखनऊ में 2.85 लाख, बरेली में 2.57 लाख, गाजियाबाद में 2.43 लाख और जौनपुर में 2.37 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं।
पूरी SIR प्रक्रिया भी काफी लंबी और चरणबद्ध रही। इसकी शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी। 4 नवंबर से गणना कार्य शुरू हुआ और पहले फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 25 दिसंबर किया गया। ड्राफ्ट लिस्ट पहले 31 दिसंबर को जारी होनी थी, लेकिन इसे बढ़ाकर 6 जनवरी 2026 किया गया। इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया 6 फरवरी तक चली, जिसे आगे बढ़ाकर 6 मार्च किया गया। सभी दावों के निस्तारण के बाद 10 अप्रैल 2026 को अंतिम सूची जारी की गई।
अगर अन्य राज्यों से तुलना करें तो उत्तर प्रदेश में नाम कटने का प्रतिशत 13.24 रहा, जो गुजरात (13.40%) के करीब है। पश्चिम बंगाल में 8.25%, बिहार में 6.05%, मध्य प्रदेश में 6.00% और राजस्थान में 5.70% नाम हटाए गए हैं। छत्तीसगढ़ में 11.80% और केरल में केवल 3.20% नाम कटे हैं।
मतदाता अब अपनी जानकारी आसानी से ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। इसके लिए voters.eci.gov.in या ceouttarpradesh.nic.in वेबसाइट पर जाकर जिला, विधानसभा और बूथ का चयन करना होगा। यदि किसी का नाम सूची में नहीं है तो वह फॉर्म-6 भरकर नया पंजीकरण करा सकता है।
इस बड़े बदलाव को आगामी चुनावों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चुनावी गणित और रणनीतियों पर सीधा असर पड़ेगा। साफ और अपडेटेड मतदाता सूची न केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेगी, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी मजबूत बनाएगी।













