चंदौली। मुगलसराय के चर्चित दवा व्यवसायी रोहिताश पाल हत्याकांड में राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन से जवाब-तलब किया है। मुख्य शूटरों और साजिशकर्ताओं की अब तक गिरफ्तारी न होने पर आयोग ने नाराजगी जताई है और चंदौली के पुलिस अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है।
यह सनसनीखेज वारदात 18 नवंबर 2025 की रात मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में जीटी रोड पर हुई थी, जब अज्ञात हमलावरों ने रोहिताश पाल को गोली मार दी थी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामले को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता खालिद वकार आबिद ने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि करीब 58 करोड़ रुपये की जमीन विवाद इस हत्या की बड़ी वजह हो सकती है, जिसमें कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका संदिग्ध है।
आयोग ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए केस दर्ज किया और जांच रिपोर्ट तलब की। हालांकि, प्रस्तुत रिपोर्ट को संतोषजनक न मानते हुए आयोग ने आगे की कार्रवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक से विस्तृत जवाब मांगा है। साथ ही शिकायतकर्ता को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने और अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया है।
आयोग ने मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 तय की है। इस बीच मृतक के परिजनों में आक्रोश और निराशा बढ़ती जा रही है। मृतक के भाई ने कहा कि चार महीने बीत जाने के बावजूद न तो सच्चाई सामने आई है और न ही मुख्य आरोपी पकड़े जा सके हैं।
परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि जल्द से जल्द मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से भी हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील की है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में प्रशासन पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है और सभी की निगाहें आगामी सुनवाई और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।













