नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई गई है। फिच ग्रुप की रिसर्च यूनिट बीएमआई ने अपनी ‘इंडिया आउटलुक’ रिपोर्ट में कहा है कि यदि ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर पर 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है, जिससे भारत में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है। बीएमआई का कहना है कि यह स्थिति यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों से मिलने वाले सकारात्मक आर्थिक प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित कर सकती है।
हालांकि, संस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 7.00 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह चालू वित्त वर्ष के अनुमानित 7.9 प्रतिशत विकास दर से कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च के बाद वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर निवेश माहौल पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी जारी की। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में तेल कीमतों में वृद्धि होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे ईंधन महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।









