चंदौली: चंदौली जिले की थाना साइबर क्राइम टीम ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता, तकनीकी दक्षता और जनता के प्रति प्रतिबद्धता का अद्भुत परिचय देते हुए यह पुरानी कहावत चरितार्थ कर दी है कि “तू चलेगा डाढ़-डाढ़, तो मैं चलूंगा पात-पात”। साइबर ठगों के पैंतरे को समझते हुए, पुलिस ने उनसे एक कदम आगे बढ़ते हुए विभिन्न तिथियों में साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए खाताधारकों से फ्रॉड किए गए कुल ₹4,22,700 (चार लाख बाईस हज़ार सात सौ रुपये) की बड़ी धनराशि सफलतापूर्वक वापस कराई है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि उन सैकड़ों पीड़ितों के चेहरों पर फिर से मुस्कान लेकर आई है, जो साइबर ठगी के कारण अपनी मेहनत की कमाई खोकर मायूस हो गए थे।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी रामजन्म यादव के कुशल नेतृत्व और निरंतर मार्गदर्शन में, साइबर क्राइम टीम के जांबाज अधिकारियों और जवानों ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अथक प्रयास किए। टीम ने साइबर फ्रॉड की जटिल प्रकृति को समझते हुए, अत्याधुनिक तकनीकों और त्वरित कार्रवाई का सहारा लिया। फ्रॉड की सूचना मिलते ही, टीम ने तुरंत संबंधित बैंकों और डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों से संपर्क साधा, जिससे ठगे गए पैसों को आगे बढ़ने से रोका जा सके और उन्हें वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
जिन पीड़ितों को उनकी मेहनत की कमाई वापस मिली है, उनमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं। इनमें नसीम अहमद (₹5,000), अनिल यादव (₹25,000), संदीप यादव (₹23,000), आनंद कुमार (₹6,000), सोनी (₹50,000), संध्या कुमारी (₹6,400), गुलाम मोहम्मद मुस्तफा (₹3,000), भूपेश कुमार सिंह (₹10,000), प्रज्ञान त्रिपाठी (₹28,000), अब्दुल रहमान (₹79,000), संजय कुमार (₹10,000), अजय चौरसिया (₹11,000), मोहम्मद शाहिद (₹55,000), राजेश गोंड (₹10,000), मोहम्मद कैफ (₹16,000), अबू तालिब (₹35,300) और ओम प्रकाश जायसवाल (₹50,000) जैसे नागरिक शामिल हैं। यह सभी पीड़ित चंदौली जनपद के ही रहने वाले हैं, जो विभिन्न माध्यमों से साइबर ठगों के जाल में फंस गए थे, चाहे वह फर्जी लिंक हों, अज्ञात कॉल हों, या ऑनलाइन लालच देने वाले विज्ञापन हों।
इस सराहनीय कार्य के साथ-साथ, चंदौली पुलिस ने साइबर अपराधों से आम जनता को बचाने के लिए जन-जागरूकता फैलाने का भी महत्वपूर्ण बीड़ा उठाया है। इसी क्रम में, पुलिस लाइन चंदौली के नवीन सभागार में एक विशेष और व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में साइबर अपराध के शिकार हुए व्यक्तियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्हें साइबर ठगी के नवीनतम और प्रचलित तरीकों, जैसे फिशिंग (Phishing), ओटीपी फ्रॉड (OTP Fraud), ऑनलाइन जॉब स्कैम (Online Job Scams), लॉटरी या इनाम का लालच (Lottery/Prize Scams), केवाईसी अपडेट के नाम पर धोखाधड़ी (KYC Update Frauds), और सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल आदि के बारे में विस्तार से समझाया गया।
कार्यक्रम के दौरान, विशेषज्ञों ने साइबर ठगी से बचने के लिए बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों पर भी प्रकाश डाला। उपस्थित लोगों को सलाह दी गई कि वे किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, अपनी व्यक्तिगत या बैंक संबंधी जानकारी (जैसे ओटीपी, पिन, पासवर्ड) किसी के साथ साझा न करें, संदिग्ध कॉल या मैसेज का जवाब न दें, और किसी भी ऑनलाइन लेनदेन में अत्यधिक सतर्कता बरतें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई गई कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना देर किए तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए, ताकि ठगे गए पैसे को वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ाई जा सके।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि और जनहितैषी पहल के लिए, सभी आवेदकों और पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक चंदौली, अपर पुलिस अधीक्षक सदर, पुलिस उपाधीक्षक साइबर, साइबर प्रभारी और जनपद चंदौली की पूरी साइबर क्राइम टीम का तहे दिल से आभार व्यक्त किया है। यह घटना दर्शाती है कि चंदौली पुलिस न केवल साइबर अपराधों से लड़ने में सक्षम है, बल्कि वह जनता को सुरक्षित रखने और उन्हें डिजिटल दुनिया में जागरूक बनाने के लिए भी कितनी प्रतिबद्ध है। यह निश्चित रूप से अन्य जिलों की पुलिस टीमों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बनेगा।













