वाराणसी। शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील स्थानों में शामिल वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर अवैध पार्किंग वसूली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि दोपहिया वाहन पार्किंग का ठेका 27 नवंबर 2025 को समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद स्टेशन परिसर और उसके आसपास खुलेआम पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है। यह पूरा मामला अब रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर सवालिया निशान लगा रहा है।
स्थानीय नागरिकों, यात्रियों और सूत्रों के अनुसार, ठेका समाप्त होने के बाद भी दोपहिया वाहनों से 20 रुपये और साइकिल से 10 रुपये की वसूली की जा रही है, जो नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आता है। सवाल यह उठता है कि जब किसी पार्किंग स्टैंड का वैध ठेका ही नहीं है, तो किस अधिकार से लोगों से शुल्क लिया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि बिना नए टेंडर या अधिकृत अनुमति के किसी भी प्रकार की पार्किंग वसूली पूरी तरह अवैध है। इसके बावजूद रोजाना सैकड़ों यात्रियों से पैसे लिए जा रहे हैं, जबकि उन्हें कोई वैध रसीद या आधिकारिक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। कई यात्रियों ने बताया कि विरोध करने पर पार्किंग कर्मियों द्वारा बदसलूकी भी की जाती है।
सूत्रों का आरोप है कि पूर्व ठेकेदार सचिन धीर से जुड़े लोग अब भी पुराने स्थान पर पार्किंग का संचालन कर रहे हैं। यह पूरा खेल कुछ अधिकारियों की मौन सहमति या लापरवाही के चलते चल रहा है। आरोप यहां तक लगाए जा रहे हैं कि रेलवे स्टेशन जैसे हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में इस तरह की गतिविधि बिना अंदरूनी संरक्षण के संभव नहीं है।
इसी बीच एक और अहम जानकारी सामने आई है। रेलवे लखनऊ मंडल द्वारा 10 नवंबर 2025 को दोपहिया और साइकिल पार्किंग का नया ठेका गुलाब सोनकर के नाम से जारी किया गया है। यह अधिकृत पार्किंग स्थल रोपवे के पास, पिलर नंबर-53, होटल सिटी-इन के सामने विकसित किया गया है। बावजूद इसके, कैंट रेलवे स्टेशन के पुराने पार्किंग स्थान पर अवैध रूप से शुल्क वसूली जारी रहने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
स्थानीय जनता और यात्रियों के मन में कई सवाल हैं —
- जब रेलवे द्वारा मान्यता प्राप्त पार्किंग दूसरी जगह आवंटित की जा चुकी है, तो कैंट स्टेशन के बाहर पुरानी जगह पर अवैध पार्किंग क्यों चलाई जा रही है?
- क्या रेलवे प्रशासन, जीआरपी और आरपीएफ को इस अवैध वसूली की जानकारी नहीं है, या फिर सबकुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं?
- स्टेशन परिसर में रोजाना मौजूद रहने वाले अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की नजरों के सामने नियमों का खुलेआम उल्लंघन कैसे हो रहा है?
सूत्रों का दावा है कि इस अवैध पार्किंग से होने वाली रोजाना की कमाई मोटी रकम में होती है और उसी का कुछ हिस्सा कथित तौर पर अंदरखाने तक पहुंचता है, जिसके चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और यात्रियों में भारी नाराजगी है। लोगों की मांग है कि अवैध पार्किंग वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यात्रियों का कहना है कि यदि रेलवे प्रशासन ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया, तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है।













