डीडीयू नगर। ओबीसी वर्ग में अति पिछड़े समुदाय को अलग आरक्षण कोटे की गारंटी देने के लिए गठित जस्टिस रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट को संसद में पेश करने की मांग तेज हो गई है। रविवार को मुगलसराय बाजार स्थित स्टैंड पर रोजगार और सामाजिक अधिकार अभियान की बैठक आयोजित हुई, जिसमें यह मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई।
बैठक का आयोजन आगामी 28 सितंबर को वाराणसी के पराड़कर भवन में होने वाले पूर्वांचल स्तरीय सम्मेलन की तैयारी को लेकर किया गया था। सम्मेलन में जस्टिस रोहिणी कमीशन रिपोर्ट लागू करने, प्रदेश से पूंजी पलायन रोकने, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के अधिकार की गारंटी पर गहन चर्चा की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजवादी नेता इंद्रजीत शर्मा ने की, जबकि संचालन पूर्व जिला पंचायत सदस्य व अभियान के जिला संयोजक तिलकधारी बिंद ने किया। बैठक के मुख्य अतिथि एआईपीएफ के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर रहे।
रोहिणी कमीशन रिपोर्ट पर नाराजगी
बैठक में वक्ताओं ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2017 में ओबीसी के अति पिछड़े समुदायों के सामाजिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जस्टिस जी. रोहिणी की अध्यक्षता में कमीशन का गठन किया था। कमीशन ने 31 जुलाई 2023 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी, लेकिन आज तक सरकार ने इसे संसद के पटल पर रखने की पहल नहीं की।
वक्ताओं ने कहा कि वाराणसी में आयोजित होने वाला सम्मेलन इस रिपोर्ट को लागू करने की मांग को नई ताकत देगा और अति पिछड़े वर्ग को उनका न्यायसंगत अधिकार दिलाने का मंच बनेगा।
पूंजी पलायन पर चिंता
बैठक में प्रदेश से लगातार हो रहे पूंजी पलायन पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश में लोगों की जमा पूंजी का लगभग 50 प्रतिशत दूसरे राज्यों में चला जा रहा है। यह पूंजी यदि प्रदेश के भीतर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास पर खर्च हो, तो प्रदेश के नौजवानों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
कर व्यवस्था और सामाजिक अधिकार
वक्ताओं ने सुझाव दिया कि यदि देश के 200 बड़े पूंजी घरानों की संपत्ति पर समुचित टैक्स और उत्तराधिकार कर लगाया जाए, तो देश के हर नागरिक को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन और भरपेट भोजन का संवैधानिक अधिकार उपलब्ध कराया जा सकता है।
सम्मेलन में भागीदारी की अपील
बैठक में निर्णय लिया गया कि वाराणसी में होने वाले सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में लोग शामिल हों, ताकि अति पिछड़े वर्ग के अधिकारों के लिए सामूहिक आवाज बुलंद की जा सके।
बैठक में प्रमुख रूप से एडवोकेट घनश्याम शर्मा, व्यापारी संजय गुप्ता, कयामुद्दीन अंसारी, राम भोग शर्मा, जितेंद्र कुमार मंडल, प्रकाश मंडल, चंद्रशेखर शर्मा, मोहम्मद कैफ और अशोक भारती ने अपने विचार रखे और आंदोलन को मजबूत बनाने पर जोर दिया।













