चंदौली। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत, सुंदर भारत के तहत चंदौली जिले के कई गांवों में कूड़ा घर और खाद गढ्ढा बनवाए गए, और कचरा उठाने के लिए कूड़ा गाड़ियाँ भी खरीदी गईं। लेकिन स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता और जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण ये सब केवल कागजी खानापूर्ति और दिखावटी निर्माण बनकर रह गए हैं।
ग्राम पंचायत मझीलेपुर सहित ब्लॉक के अन्य गांवों में ग्राम पंचायत निधि और मनरेगा योजना के तहत लाखों रुपए खर्च कर कूड़ा घर और खाद गढ्ढा तैयार किए गए। कूड़ा निस्तारण के लिए खरीदी गई कूड़ा गाड़ियों का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आज तक इन कूड़ा घरों में एक भी चुटकी कचरा नहीं फेका गया, न ही खाद गढ्ढों में कोई खाद तैयार हुई है।
ग्राम पंचायत मझीलेपुर में हाईवे किनारे पंचायत भवन के पास बने कूड़ा घर और खाद गढ्ढा जिम्मेदारों की उदासीनता की गवाही दे रहे हैं। जहां कूड़ा फेंकने के बजाय लोग समय बिताने के लिए ताश खेलते दिख रहे हैं।
ग्राम प्रधान नरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके गांव में केवल एक ही सफाई कर्मी, नवीन कुमार, तैनात है, जो महीने में आधा महीना रोस्टर का बहाना बनाकर गायब रहते हैं। उन्होंने कहा, “गांव में सफाई और कूड़ा फेंकने की क्या उम्मीद की जा सकती है, जब कूड़ा उठाने के लिए खरीदी गई गाड़ी को चलाने के लिए किसी चालक की नियुक्ति तक नहीं की गई।”
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे हालातों में कचरा निस्तारण की योजना केवल दिखावटी और अधूरी साबित हुई है। ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और कूड़ा घर व गाड़ियों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी योजनाओं की सफलता सिर्फ निर्माण और खरीदारी में नहीं, बल्कि उनकी प्रभावी कार्यान्वयन और नियमित निगरानी में है। यदि इसे गंभीरता से लागू किया जाए, तो स्वच्छ भारत मिशन का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सकता है।













