चंदौली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे से ठीक पहले चंदौली पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। विपक्षी नेताओं को नजरबंद करने की जल्दबाजी में पुलिस ने गलती से भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता और पूर्व प्रधान ओमप्रकाश सिंह को ही घर में नजरबंद कर दिया। इस घटना से पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ खड़े हुए हैं, वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है।
नाम की समानता बनी बड़ी गलती का कारण
यह मामला बबुरी थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, पुलिस की टीम गुरुवार देर रात करीब 1 बजे भाजपा कार्यकर्ता ओमप्रकाश सिंह के घर पहुंची और उन्हें सख्त हिदायत दी कि वे घर से बाहर न निकलें।
दरअसल, पुलिस जिस व्यक्ति को हिरासत में लेना चाहती थी, उसका नाम भी ओमप्रकाश सिंह ही था और वह विपक्षी कार्यकर्ता था। नाम की समानता के चलते पुलिस ने बिना पुष्टि किए भाजपा कार्यकर्ता को ही नजरबंद कर दिया।
सोशल मीडिया पर छलका दर्द
गलत तरीके से नजरबंद किए गए भाजपा कार्यकर्ता ओमप्रकाश सिंह ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखी—
“दीपक से लेकर कमल तक मैं पार्टी के साथ खड़ा रहा हूं। अपनी ही सरकार में नजरबंद होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उनकी यह पोस्ट वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया और पार्टी के अंदर भी चर्चा का विषय बन गया।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने जताई आपत्ति
भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह ने कहा—
“खुरूहुजा के पूर्व प्रधान ओमप्रकाश सिंह एक जमीनी व समर्पित कार्यकर्ता हैं। अगर उनके साथ ऐसा हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”
इस बयान से साफ है कि भाजपा नेतृत्व भी इस घटना को गंभीरता से ले रहा है।
पुलिस की सफाई, लेकिन सवाल बरकरार
मामला सामने आने के बाद क्षेत्राधिकारी (सीओ) ने मीडिया के सामने सफाई दी। उन्होंने माना कि नामों की समानता के कारण यह गलती हुई।
हालांकि, जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री के दौरे जैसे संवेदनशील मौके पर ऐसी बड़ी चूक बेहद चिंताजनक है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पुलिस अपने ही दल के नेता और विपक्षी कार्यकर्ता में फर्क नहीं कर पा रही, तो सुरक्षा इंतजामों पर भरोसा कैसे किया जाए?













