सिंगरौली। जिले के सरकारी प्राथमिक विद्यालय पूर्व टोला खुटार में राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को ठेस पहुँचाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए प्रभारी प्रधानाध्यापक रेवतीरमण शाह को निलंबित कर दिया है। यह कदम भारतीय झंडा संहिता 2002 के उल्लंघन की पुष्टि के बाद उठाया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल खबर के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (जेडीओ) श्री एस.बी. सिंह ने तत्काल संकुल प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खुटार को जांच के लिए निर्देशित किया। जांच टीम ने विद्यालय परिसर का दौरा किया और स्थानीय नागरिकों तथा शिक्षक कर्मचारियों से पूछताछ के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि फटा और क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था।
जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्राथमिक शिक्षक और प्रभारी प्रधानाध्यापक ने पहले कार्यालयीन नोटिस का भी असंतोषजनक जवाब दिया था। कार्यालय ने उनसे 28 जनवरी 2026 तक स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनके उत्तर में तथ्यात्मक कमियों और लापरवाही के संकेत मिले।
जिला शिक्षा अधिकारी एस.बी. सिंह ने बताया कि यह कृत्य न केवल शिक्षा संस्थान के प्रति उदासीनता को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान भी है। उन्होंने कहा, “भारतीय झंडा संहिता 2002 के भाग-2, धारा 2.2 के अनुसार फटे या मैले झंडे को फहराना पूरी तरह से वर्जित है। ऐसे उल्लंघन को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
निलंबन और प्रशासनिक कार्रवाई
उक्त कृत्य को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के अंतर्गत गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखा गया। इसी आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापक रेवतीरमण शाह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बगदरा, विकासखंड चितरंगी निर्धारित किया गया है। नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
विद्यालय और प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान सभी विद्यालयों में अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या उपेक्षा पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी स्कूल प्राचार्यों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे झंडे की स्थिति की नियमित जांच करें और समय-समय पर स्कूल परिसरों में क्षतिग्रस्त झंडों को बदलवाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।
इस घटना के बाद जिले में शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रशासन के प्रति नागरिकों की नजरें और अधिक सख्त हो गई हैं। स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को सराहा है और कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।
सामाजिक और शैक्षणिक संदेश
इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि शिक्षक और प्राचार्य न केवल शिक्षा का संचालन करें, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को भी गंभीरता से लें। शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों में नियमित निरीक्षण और चेतावनी जारी करने की योजना बनाई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
सिंगरौली जिले में यह मामला एक उदाहरण बन गया है कि शिक्षा संस्थानों में अनुशासन, नियमों का पालन और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान अनिवार्य हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा।













