वाराणसी। प्रस्तावित यूजीसी 2026 नियमों के विरोध में सोमवार को काशी में छात्र, युवा, अधिवक्ता और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। सामाजिक संगठन केसरिया भारत के नेतृत्व में कचहरी क्षेत्र में जन आक्रोश मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेते हुए सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की।
मार्च में शामिल होने के लिए संगठन के कार्यकर्ता और समर्थक वरुणा पुल स्थित शास्त्री घाट पर एकत्र हुए। इसके बाद राष्ट्रीय संयोजक कृष्णानंद पांडेय के नेतृत्व में जुलूस जिलाधिकारी कार्यालय की ओर रवाना हुआ। वहां पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा और यूजीसी 2026 के नियमों को निरस्त करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान प्रतिभागियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि प्रस्तावित नियम छात्रों और युवाओं के हितों के खिलाफ हैं। उनका कहना था कि जब तक इस कानून को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
संगठन के राष्ट्रीय संयोजक कृष्णानंद पांडेय ने कहा कि इससे पहले भी जनवरी में तीन दिनों तक धरना और प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश भी मिला था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान अधिवक्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लेते हुए यूजीसी के नए नियमों का विरोध किया। केसरिया भारत व धरोहर संरक्षण के प्रदेश अध्यक्ष गौरीश सिंह और गौरव मिश्र ने लोगों से आंदोलन को मजबूत बनाने की अपील की।
जन आक्रोश मार्च में आनंद मिश्र ‘बब्बू’, चन्द्रदेव पटेल, बृजेश पांडेय, अधिवक्ता अनुज मिश्र, अर्पित मिश्रा, अशोक पांडेय, राकेश त्रिपाठी, अमन सिंह, उपेंद्र सिंह, शुभम पांडेय, ऋषभ सिंह, शिवम उपाध्याय, अधिवक्ता अमन कुमार त्रिपाठी और अधिवक्ता रामानंद पांडेय सहित बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।













