चंदौली। क्षेत्र के कई गांवों में इन दिनों पालतू जानवर लम्पी वायरस की चपेट में आ रहे हैं। पिछले दस दिनों से सुरतापुर, रमोली, पथरा, हृदयपुर, प्रभुपुर बैराठ और रईया गांवों में यह बीमारी दस्तक दे चुकी है और अब सरौली, महमदपुर और चकरा गांवों में भी तेजी से फैल रही है।
लक्षण और खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि इस रोग से ग्रसित पशुओं के शरीर पर जगह-जगह गिल्टियां निकल आती हैं। बुखार आने के बाद जानवर चारा-पानी छोड़ देते हैं और धीरे-धीरे चलने-फिरने में भी असमर्थ हो जाते हैं। कई बार यह बीमारी जानलेवा साबित होती है। सरौली गांव में आजाद का और महमदपुर गांव में प्रवीण का पशु इसी बीमारी से मर चुका है।
सरकारी व्यवस्था पर सवाल
पशुपालकों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों से बारिश के मौसम में नियमित टीकाकरण की व्यवस्था नहीं की जा रही है। सरकारी डॉक्टर गांवों में नहीं पहुंचते, जिससे उन्हें निजी इलाज पर निर्भर होना पड़ता है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जैसे ही किसी गांव में यह रोग पहुंचता है, वहां एक दर्जन से अधिक पशु प्रभावित हो जाते हैं।
पशुपालकों की पीड़ा
सरौली, महमदपुर और चकरा गांव के दया शंकर यादव, राम लखन यादव, सन्तराज, रमाशंकर, बृजेश, आजाद, जमुना, प्रवीण, दीना नाथ, मुन्ना, प्रमोद और मनोज समेत दर्जनों पशुपालकों ने आरोप लगाया कि पशुपालन विभाग की लापरवाही से यह संक्रमण फैल रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते टीकाकरण और इलाज की व्यवस्था की गई होती तो पशुओं की मौतें टल सकती थीं।
ग्रामीणों की मांग
पशुपालकों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तुरंत पशु चिकित्सक और टीकाकरण टीमें भेजी जाएं। साथ ही बीमार पशुओं के इलाज के लिए दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और बिगड़ सकती है और सैकड़ों पशु इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
विशेष संवाददाता- गनपत राय













