जौनपुर। जिले की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला किसी भाषण, कार्यक्रम या राजनीतिक बयानबाज़ी का नहीं, बल्कि मतदाता सूची में सामने आई एक हैरान करने वाली विसंगति का है। आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने दावा किया है कि मल्हनी विधानसभा क्षेत्र की एक मतदाता सूची में पूर्व सांसद धनंजय सिंह और बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह का नाम एक ही मकान संख्या पर दर्ज मिला है। ठाकुर ने इस तथ्य को “अत्यधिक संवेदनशील” बताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को विस्तृत जांच के लिए पत्र भेजा है।
मतदाता सूची में दर्ज नामों को लेकर सवालों की बौछार
अमिताभ ठाकुर के मुताबिक उन्हें जो मतदाता सूची मिली है, वह अनुभाग संख्या 1, बनसफा की है। इस सूची में क्रम संख्या 115 पर धनंजय सिंह के भाई जितेंद्र सिंह, 116 पर धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला सिंह और 118 पर स्वयं धनंजय सिंह का नाम दर्ज है। लेकिन इसी सूची में क्रम संख्या 120 पर आलोक प्रताप सिंह का नाम भी मौजूद है—और वह भी उसी मकान संख्या पर।
ठाकुर का कहना है कि यह स्थिति सामान्य नहीं है और प्रथमदृष्टया संदेह पैदा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार और एक बर्खास्त पुलिसकर्मी का एक ही पते पर मतदाता के रूप में दर्ज होना, चुनाव प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या यह गलती है या कुछ और?
अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि यह मामला सिर्फ सूची में त्रुटि भी हो सकता है, लेकिन ऐसी गलती भी चुनावी कामकाज में लापरवाही की ओर इशारा करती है। उन्होंने कहा कि अगर यह तकनीकी गलती है, तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
वहीं अगर यह किसी उद्देश्यपूर्ण हेराफेरी का संकेत देता है, तो इसकी जाँच निष्पक्ष एजेंसी द्वारा कराई जानी चाहिए। ठाकुर ने मतदाता सूची की प्रति भी मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजी है, ताकि जांच टीम तथ्यात्मक रूप से इसकी पुष्टि कर सके।
पार्टी की प्रवक्ता ने भी जताई चिंता
आजाद अधिकार सेना की प्रवक्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने भी इस पूरे मामले को लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा बताते हुए कहा कि अगर मतदाता सूचियाँ ही सही न हों, तो चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
स्थानीय राजनीति में हलचल तेज
जैसे ही मामला सामने आया, जिले की राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। धनंजय सिंह जौनपुर की राजनीति में हमेशा ही एक प्रभावशाली नाम रहे हैं। दूसरी ओर, बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह का नाम उसी पते पर दर्ज होना स्थानीय स्तर पर और भी सवाल खड़े कर रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या यह महज एक लिपिकीय गलती है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा कारण है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि प्रशासन अब इस पूरे मामले पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है और जल्द ही इस पर कार्रवाई की संभावना है।
जाँच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से मामला सुर्खियों में आया है, उससे यह साफ है कि इस पर जल्द ही जांच शुरू हो सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच के बाद सामने आने वाले तथ्य क्या बताते हैं—
- क्या यह मात्र एक साधारण गलती निकलेगी?
- या यह किसी बड़े खेल का हिस्सा साबित होगा?
जिस भी दिशा में मामला जाए, इतना तय है कि यह विवाद आगामी दिनों में जौनपुर की राजनीति को और गर्माहट देगा।













