वाराणसी। शहर में सामने आए कोडीन कफ सिरप अवैध कारोबार मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं, जिसने पुलिस जांच की गंभीरता और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार मामले के प्रमुख नाम प्रशांत उपाध्याय उर्फ लड्डू और मिलन यादव अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जबकि इन्हें लेकर कई चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आ रही हैं।
कोतवाली पुलिस उस समय सकते में आ गई जब पूछताछ के दौरान मौसी के लड़के आदित्य जायसवाल को हिरासत में लेकर तलाशी ली गई। जांच में उसके बैंक खाते में करीब 70 लाख रुपये की जमा राशि सामने आई। महज 26 वर्ष की उम्र में इतनी बड़ी रकम कहां से आई, यह सवाल जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी पहेली बना हुआ है।
सूत्र बताते हैं कि जांच के दौरान कई संदिग्ध व्यक्तियों को थाने बुलाकर पूछताछ तो की गई, बयान भी दर्ज किए गए, लेकिन कथित रूप से लेन-देन के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। इस तरह की जानकारी सामने आने के बाद पूरी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले में जेल प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि वाराणसी जिला जेल में बंद आरोपी सामान्य कैदियों की तरह नहीं, बल्कि “राजा साहब” जैसी सुविधाओं में रह रहे हैं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
एक अन्य अहम खुलासे में कोतवाली थाना क्षेत्र के गोलघर इलाके में स्थित एक मकान का जिक्र सामने आया है, जहां से कथित तौर पर कोडीन कफ सिरप का अवैध कारोबार संचालित होता था। यह मकान प्रतीक गुजराती से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन अब तक यह ठिकाना पुलिस की कार्रवाई से बाहर है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस गतिविधि की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इसके अलावा मामले में नाम आने वाले दिनेश यादव द्वारा गोदौलिया क्षेत्र में करीब 12 करोड़ रुपये का आलीशान मकान खरीदे जाने की भी चर्चा है, लेकिन उनकी संपत्तियों पर अब तक कोई कुर्की या कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि इनके पीछे किसी बड़े प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण हो सकता है, जिस वजह से एजेंसियाँ खुलकर कदम उठाने से बच रही हैं।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि ऐसे संगठित अपराधों में शामिल प्रभावशाली लोग कानून से बचते रहे, तो आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।
वहीं, इन तमाम आरोपों पर वाराणसी पुलिस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कोडीन कफ सिरप के इस मामले ने पुलिस जांच में कथित लापरवाही, अवैध कारोबार और कानून के समक्ष समानता जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर कर दिया है, जिस पर अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।













