गाज़ीपुर। बाहुबली पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के परिवार को एक और बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए एवं अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष–1) शक्ति सिंह ने मंगलवार को मुख्तार की पत्नी आफ्सा अंसारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्ति की कुर्की पर रोक लगाने की मांग की थी।
अदालत ने कहा कि जो आवेदन दायर किया गया है, वह संदिग्ध प्रतीत होता है और प्रथमदृष्टया यह नहीं कहा जा सकता कि वह वास्तव में आफ्सा अंसारी द्वारा ही प्रस्तुत कराया गया था।
फर्जी हस्ताक्षर का खुलासा, वकालतनामा संदिग्ध
अदालत के आदेश में कहा गया है कि जिस वकालतनामे के आधार पर याचिका दाखिल की गई, उस पर मौजूद हस्ताक्षर आफ्सा अंसारी के वास्तविक हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते। इसकी पुष्टि विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट से भी हुई है, जिसमें स्पष्ट रूप से हस्ताक्षरों को फर्जी बताया गया है।
इसी आधार पर अदालत ने यह मानते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया है।
धाराएं भी गंभीर — कई प्रावधानों में केस दर्ज
इस प्रकरण में थाना मुहम्मदाबाद, जनपद गाज़ीपुर में मु.अ.सं. 245/2025 के तहत निम्न धाराओं में मुकदमा पहले ही दर्ज है—
- धारा 319(2)
- धारा 318(4)
- धारा 338
- धारा 336(3)
- धारा 340(2) भादंसं
पुलिस के अनुसार जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।
उमर अंसारी की भूमिका पर सवाल, पहले भी रह चुके हैं जेल में
अभियोजन के अनुसार, फर्जी वकालतनामा कोर्ट में दाखिल कराने में मुख्तार अंसारी के पुत्र उमर अंसारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उमर इसी प्रकरण में पहले भी कई माह जेल में निरुद्ध रह चुके हैं। ताज़ा रिपोर्ट और कोर्ट के आदेश के बाद अब उनके खिलाफ मामला और मजबूत हो गया है।
अधिवक्ता लियाकत अली पर भी मुकदमा
इस मामले में आवेदिका के अधिवक्ता लियाकत अली का नाम भी सामने आया है। एफएसएल रिपोर्ट और कोर्ट के टिप्पणियों के आधार पर उमर अंसारी और अधिवक्ता लियाकत अली—दोनों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया है। अभियोजन का कहना है कि कोर्ट को गुमराह करने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने की यह गंभीर कोशिश है।
न्यायाधीश शक्ति सिंह का सख्त रुख, पहले भी दिए हैं बड़े फैसले
- विशेष न्यायाधीश शक्ति सिंह का न्यायिक करियर बेहद सक्रिय माना जाता है।
- वे इससे पहले मुज़फ्फरनगर में तैनाती के दौरान कई हाई–प्रोफाइल मामलों का संचालन कर चुके हैं।
- उनकी अदालत ने चर्चित रामपुर तिराहा कांड में भी महत्वपूर्ण निर्णय दिया था।













