वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में मनरेगा को लेकर कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के प्रस्तावित धरने से पहले ही पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया। मंगलवार को जवाहर नगर एक्सटेंशन स्थित पीएम जनसंपर्क कार्यालय के आसपास भारी पुलिस बल की तैनाती के चलते कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं हो सका और पूरा इलाका सामान्य बना रहा।
एनएसयूआई की ओर से मनरेगा में किए गए बदलावों के विरोध में धरने का आह्वान किया गया था। पूर्वी उत्तर प्रदेश के एनएसयूआई अध्यक्ष ऋषभ पांडेय ने सोशल मीडिया के जरिए कार्यकर्ताओं से मौके पर पहुंचने की अपील की थी। इसके बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था शिवहरि मीना के नेतृत्व में लंका और जवाहर नगर एक्सटेंशन क्षेत्र में बैरिकेडिंग के साथ अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई। पुलिस ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना अनुमति किसी भी तरह का धरना या प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा।
शाम तक न तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे और न ही कोई हंगामे की स्थिति बनी। पुलिस की सख्त निगरानी के चलते प्रदर्शनकारी छोटे-छोटे समूहों में भी एकत्र नहीं हो सके। प्रशासन की सतर्कता के कारण प्रस्तावित धरना पूरी तरह विफल रहा।
दरअसल एनएसयूआई और कांग्रेस केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह नई योजना “विकसित भारत–ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन गारंटी” लागू किए जाने का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि नई योजना के जरिए मनरेगा के संवैधानिक स्वरूप को कमजोर किया जा रहा है और महात्मा गांधी का नाम हटाकर योजना की मूल भावना से छेड़छाड़ की गई है। हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि नई योजना में रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाकर 125 कर दी गई है।
इससे पहले रविवार को “Save MGNREGA” मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के बाद मामला और गरमा गया था। उस कार्रवाई में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया था। उसी के विरोध में मंगलवार को धरने का ऐलान किया गया था।
इसी बीच कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का आरोप है। हालांकि वाराणसी में प्रस्तावित धरने का मुख्य मुद्दा मनरेगा ही रहा।
पुलिस की सख्ती के चलते भले ही धरना नहीं हो सका, लेकिन मनरेगा और अन्य मुद्दों को लेकर सियासी माहौल अभी भी गर्म बना हुआ है।













