वाराणसी। साल के अंतिम दिन बुधवार को काशी नगरी आस्था के अद्भुत रंग में रंगी नजर आई। घने कोहरे और कड़ाके की सर्दी के बावजूद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। नववर्ष की पूर्व संध्या पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन की कामना लेकर देश के कोने-कोने से आए भक्तों से मंदिर परिसर और काशी विश्वनाथ धाम गुलजार रहा।
बुधवार तड़के मंगला आरती से पहले ही झांकी दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने दशाश्वमेध घाट समेत विभिन्न गंगा घाटों पर पवित्र स्नान कर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई। सुबह के समय कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम रही, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं दिखी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, क्रिसमस से ही काशी में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और प्रतिदिन लाखों की तादाद में भक्त वाराणसी पहुंच रहे हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के विकसित और विस्तारित स्वरूप के बाद दर्शन व्यवस्था सुगम हुई है, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है। भक्तों का मानना है कि वर्ष के अंतिम दिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने से आने वाला नया साल सुख-समृद्धि और मंगल से भरपूर होता है।
भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रशासन ने वीआईपी और स्पर्श दर्शन पर रोक लगा रखी है तथा केवल झांकी दर्शन की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर, काशी विश्वनाथ धाम और गंगा घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, वहीं भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब नववर्ष के अवसर पर युवाओं की पसंद भी बदल रही है। गोवा, मनाली जैसे पर्यटन स्थलों के बजाय काशी और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो सनातन संस्कृति और आस्था के प्रति बढ़ते जुड़ाव का स्पष्ट संकेत है।









