वाराणसी। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर काशी के शंकराचार्य घाट पर विशेष कार्यक्रम आयोजित कर गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन परमाराध्य परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत शंकराचार्य घाट पर विधिवत गंगा पूजन से हुई। इसके बाद छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर तिलक लगाकर पुष्प अर्पित किए गए और उपस्थित लोगों को गौरक्षा का संकल्प दिलाया गया। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने शिवाजी महाराज को गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक बताते हुए उनके जीवन और आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक थे और उन्होंने गौ, ब्राह्मण तथा धर्म की रक्षा के लिए जीवन भर संघर्ष किया। शास्त्रों में भी राजा का कर्तव्य गौ, ब्राह्मण और देवालयों की रक्षा करना बताया गया है। उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक हिंदू को शिवाजी महाराज के आदर्शों का अनुसरण करते हुए धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान सिद्ध कलाकारों द्वारा शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित लघु नाटिका का मंचन भी किया गया, जिसमें गौरक्षा से जुड़े प्रसंगों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावुक और प्रेरित किया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय सारस्वत परिषद की ओर से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को गौरक्षा के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों के सम्मान स्वरूप “करपात्र गौभक्त सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान गिरीश चंद्र तिवारी और प्रो. विवेकानंद तिवारी द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में जानकारी दी गई कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज शनिवार सुबह काशी स्थित श्रीविद्यामठ से लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे। प्रस्थान से पहले वे चिंता गणेश मंदिर और संकट मोचन मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे तथा सामूहिक हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंगबाण का पाठ होगा। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर गौभक्तों और अधिवक्ताओं द्वारा उनका स्वागत किया जाएगा और वे निर्धारित मार्ग से होते हुए 11 मार्च को लखनऊ पहुंचकर गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद करेंगे।













