चंदौली। इलिया थाना क्षेत्र के मालदह गांव से बनरसिया माइनर तक नहर किनारे बनी करीब चार किलोमीटर लंबी सड़क ओवरलोड डंपरों की लगातार आवाजाही से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। यह सड़क मूलतः छोटे वाहनों और ग्रामीण परिवहन के लिए बनाई गई थी, लेकिन भारी ट्रकों और डंपरों के दबाव ने इसकी संरचना को कमजोर कर दिया है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कई हिस्सों में सड़क धंस गई है, गहरे गड्ढे बन गए हैं और मार्ग पर सुरक्षित चलना भी मुश्किल हो गया है। यह रास्ता उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से मिट्टी और गिट्टी से लदे ओवरलोड डंपर इसी मार्ग से लगातार गुजर रहे हैं। सड़क की क्षमता से अधिक वजन के कारण इसकी ऊपरी परत उखड़ गई और जगह-जगह दरारें पड़ गईं। हाल ही में एक भारी ट्रक के धंस जाने की घटना के बाद स्थिति और भी चिंताजनक हो गई, जिससे कई घंटों तक मार्ग पूरी तरह जाम रहा और लोगों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।
मालदह, बनरसिया और आसपास के गांवों के निवासियों ने बताया कि यह मार्ग उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा है। स्कूली बच्चे, किसान, मजदूर और मरीज इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं। सड़क खराब होने से स्कूल जाने वाले बच्चों को देर हो रही है, किसानों को बाजार तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है और आपातकालीन स्थितियों में अस्पताल पहुंचना भी जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत देखकर अब बाइक और साइकिल चलाना भी खतरनाक हो गया है।
लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग को कई बार लिखित और मौखिक शिकायत दी गई, लेकिन ओवरलोड वाहनों पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई गई। परिणामस्वरूप सड़क की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यह मार्ग भारी वाहनों के लिए अधिकृत नहीं है, फिर भी निर्माण कार्यों में लगे डंपरों को बिना रोक-टोक गुजरने दिया जा रहा है।
क्षेत्र के व्यापार और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी इसका असर साफ दिखने लगा है। बाजार तक सामान पहुंचाने में देरी हो रही है और परिवहन लागत बढ़ गई है। कई वाहन चालक अब इस मार्ग से जाने से बच रहे हैं, जिससे आसपास के गांवों की कनेक्टिविटी प्रभावित हो रही है। बरसात आने पर हालात और खराब होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि गड्ढों में पानी भरने से सड़क पूरी तरह कीचड़ में बदल सकती है।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के एसडीओ राकेश तिवारी ने माना कि ओवरलोड वाहनों के चलते सड़क को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है और विभागीय स्तर पर मरम्मत तथा भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि सड़क की शीघ्र मरम्मत कराई जाए और इस मार्ग पर ओवरलोड डंपरों के प्रवेश पर कड़ी निगरानी रखी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो और क्षेत्रीय आवागमन सुचारू रूप से बहाल हो सके।













