उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ और बलिया स्थित आवास और प्रतिष्ठानों पर आयकर विभाग की छापेमारी की खबर सामने आई। इस कार्रवाई के बाद सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और मामले ने मानवीय संवेदनाओं बनाम सरकारी कार्रवाई की बहस को जन्म दे दिया।
योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने इस पूरी कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई और इसे संवेदनहीनता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह पिछले करीब दो वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। मंत्री के अनुसार, उनके अधिकतर व्यावसायिक कार्य लगभग बंद हो चुके हैं और वे फिलहाल लखनऊ स्थित अपने आवास पर आइसोलेशन में रहकर इलाज ले रहे हैं। ऐसे समय में आयकर विभाग की छापेमारी को उन्होंने मानवीय दृष्टि से अनुचित और असंवेदनशील बताया।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा कि उमाशंकर सिंह उनके समधी हैं और उनकी स्थिति बेहद नाजुक है। उन्होंने आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान डॉक्टरों और नर्सों को उनके घर में आने-जाने से रोका गया, जिससे उनके इलाज और देखभाल पर प्रतिकूल असर पड़ा। मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इलाज में बाधा के कारण कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
इस घटना ने राजनीतिक रिश्तों और व्यक्तिगत संवेदनाओं को भी चर्चा में ला दिया है। मंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि एक गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की देखभाल और मानवता से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करे, लेकिन किसी भी बीमार व्यक्ति को आवश्यक चिकित्सा सुविधा से वंचित करना उचित नहीं कहा जा सकता।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि न्यायालय अक्सर दया और मानवीय आधार पर याचिकाओं को स्वीकार करता है, विशेषकर तब जब व्यक्ति गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिया कि ऐसी परिस्थितियों में संवेदनशीलता दिखाना शासन और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी होती है।
छापेमारी की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दल इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे सामान्य जांच प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं। हालांकि, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का बयान इस मामले को राजनीतिक से ज्यादा मानवीय मुद्दा बना रहा है।
उन्होंने अंत में प्रार्थना की कि निर्णय लेने वाले जिम्मेदार लोग विवेक और संवेदनशीलता के साथ कदम उठाएं, ताकि कानून की प्रक्रिया के साथ-साथ मानवीय पक्ष भी सुरक्षित रह सके। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।













