नई दिल्ली। नेपाल की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद सत्ता का नेतृत्व कौन करेगा, इस पर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच, पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नाम नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री (Interim PM) के रूप में सामने आया है। खास बात यह है कि यह नाम किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि देशभर के Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ाया है।
Gen-Z आंदोलन और सुशीला कार्की को समर्थन
पिछले कुछ हफ्तों से नेपाल में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिल रहा है। वे देश की राजनीतिक अस्थिरता और नेताओं के भ्रष्टाचार से परेशान हैं। इसी सिलसिले में हाल ही में एक वर्चुअल बैठक आयोजित हुई, जिसमें करीब 5000 युवाओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक में सबसे ज्यादा समर्थन सुशीला कार्की के नाम को मिला।
सूत्रों के अनुसार, 2500 से अधिक युवाओं ने सीधा समर्थन उनके नाम के पक्ष में दिया। युवाओं का मानना है कि अंतरिम सरकार का नेतृत्व किसी ऐसे चेहरे के हाथों में होना चाहिए जो निष्पक्ष, ईमानदार और राजनीतिक दवाब से मुक्त हो।
एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा—
“यह सिर्फ एक अंतरिम सरकार है। हमें ऐसा नेतृत्व चाहिए जो हमारे लोकतंत्र को बचा सके। इसी वजह से हमने सुशीला कार्की का नाम आगे बढ़ाया है।”
कौन हैं सुशीला कार्की?
- जन्म: 7 जून 1952, विराटनगर (नेपाल)
- शिक्षा: 1975 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी से राजनीति शास्त्र में एमए
- कानूनी करियर: उन्होंने कानून की पढ़ाई कर वकालत शुरू की और बाद में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं।
- कार्यकाल: 11 जुलाई 2016 से 7 जून 2017 तक नेपाल सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश
- पहचान: सख्त, ईमानदार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाली शख्सियत
सुशीला कार्की का नाम नेपाली राजनीति में किसी राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष और सशक्त महिला चेहरा होने की वजह से आगे आया है।
भारत से गहरा कनेक्शन
सुशीला कार्की का भारत से भी गहरा नाता रहा है। उन्होंने अपनी पढ़ाई भारत के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी से पूरी की। इस कारण उनका भारत के साथ सांस्कृतिक और शैक्षिक जुड़ाव लंबे समय से रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर वे अंतरिम प्रधानमंत्री बनती हैं तो भारत-नेपाल संबंधों को नई दिशा मिल सकती है। भारत में पढ़ाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि होने के कारण वे दोनों देशों के बीच सहज संवाद और सहयोग की सेतु बन सकती हैं।
क्यों चर्चा में हैं कार्की?
- वे नेपाल की पहली और अब तक की एकमात्र महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं।
- न्यायपालिका में उनकी छवि बेहद साफ-सुथरी और ईमानदार मानी जाती है।
- उन्होंने अपने कार्यकाल में कई सख्त फैसले लिए और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दी।
- राजनीतिक दबावों के बावजूद स्वतंत्र न्यायपालिका की रक्षा की।
यही कारण है कि आज युवा वर्ग उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में देख रहा है, जिस पर देश भरोसा कर सकता है।
नेपाल में मौजूदा स्थिति
केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता और गहरी हो गई है। संसद और प्रमुख राजनीतिक दलों में मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। दूसरी ओर, जनता खासकर युवा वर्ग बदलाव की मांग कर रहा है। ऐसे में किसी भी अंतरिम सरकार का नेतृत्व एक गैर-राजनीतिक और स्वीकार्य चेहरा ही कर सकता है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बनती हैं तो यह नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास का अहम मोड़ साबित हो सकता है। एक तरफ वे न्यायपालिका की गरिमा को दर्शाती हैं और दूसरी तरफ युवाओं की उम्मीदों को।
आगे की राह
फिलहाल नेपाल में परिस्थितियां हर दिन बदल रही हैं। यह साफ है कि देश को स्थिरता की ज़रूरत है और इसके लिए युवाओं का दबाव राजनीतिक दलों पर लगातार बढ़ रहा है। यदि सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री चुना जाता है तो नेपाल न केवल पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बल्कि पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री भी देखेगा।
एसोसिएट एडिटर- अनिरुद्ध जायसवाल













