जशपुरनगर। शहर के विभिन्न वार्डों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की जर्जर और भवनविहीन स्थिति को लेकर अब ठोस पहल की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियवंदा सिंह जूदेव ने आश्वासन दिया है कि शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने के लिए जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। शनिवार को पूर्व पार्षदों और आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने उनसे मुलाकात कर शहर के कई केंद्रों की खराब हालत से अवगत कराया और ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सौंपते हुए वार्ड क्रमांक 8 के पूर्व पार्षद गणेश साहू ने बताया कि उनके वार्ड का आंगनबाड़ी भवन लगभग तीन वर्ष पहले ही नगरपालिका द्वारा जर्जर घोषित किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। इससे यहां पढ़ने आने वाले छोटे बच्चों और कार्यकर्ताओं को रोजाना असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने बताया कि यह समस्या केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई अन्य क्षेत्रों में भी आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत दयनीय बनी हुई है। तेली टोली, दर्जी मोहल्ला, बनिया टोली, खजांची टोली और शिव मंदिर पारा जैसे इलाकों में संचालित केंद्रों के भवन भी जर्जर अवस्था में हैं। कई स्थानों पर भवन इतने खराब हो चुके हैं कि वहां बच्चों को बैठाने तक की उचित व्यवस्था नहीं है, जबकि कुछ केंद्र ऐसे भी हैं जो किराए के कमरों या अस्थायी व्यवस्था में संचालित हो रहे हैं।
आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने बताया कि भवनों की जर्जर हालत के कारण न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि पोषण आहार वितरण और अन्य योजनाओं के संचालन में भी दिक्कतें आ रही हैं। केंद्रों में पर्याप्त जगह, स्वच्छ शौचालय, पेयजल और सुरक्षित कक्ष जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियवंदा सिंह जूदेव ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, इसलिए इनका सुरक्षित और व्यवस्थित होना बेहद जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शहर के सभी जर्जर और भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों की सूची तैयार कर संबंधित विभाग को भेजी जाएगी, ताकि मरम्मत और नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू हो सके।
उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर जल्द ही ठोस योजना बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी केंद्र का भवन पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका है तो वहां नए भवन के निर्माण का प्रस्ताव प्राथमिकता के आधार पर रखा जाएगा, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके।
प्रियवंदा सिंह जूदेव ने आगे कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर आंगनबाड़ी केंद्र में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस विषय पर जल्द ही महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से चर्चा कर आवश्यक स्वीकृति दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
स्थानीय लोगों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि इस पहल के बाद लंबे समय से लंबित भवन निर्माण और मरम्मत कार्य को गति मिलेगी और छोटे बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा व पोषण सेवाएं मिल सकेंगी। शहर में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने की यह पहल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।













